Ujaad (उजाड़)

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उजाड़ (Ujaad) पर दिल को छू लेने वाली शायरियां

1. वीरान बस्ती

किसी ने पूछा मुझसे, क्यों तुम्हारी आंखें नम हैं,
मैंने कहा, मेरे शहर को तुमने क्यों उजाड़ दिया है।

2. दिल का आलम

दिल का आलम अब कुछ ऐसा है, कह नहीं पाते,
तेरी यादों ने हर तरफ से मुझे उजाड़ रखा है।

3. ख्वाबों का सफर

ख्वाबों का सफर अब कहाँ ले जाए हमें,
जहाँ से चले थे, वो भी अब उजाड़ सा लगता है।

4. रिश्तों का टूटना

रिश्तों की डोर जब कमजोर पड़ जाती है,
सारा चमन फिर एक पल में उजाड़ हो जाता है।

5. यादों का शहर

यादों का शहर आज भी मेरे दिल में बसा है,
मगर तेरे जाने के बाद सब कुछ उजाड़ गया है।

6. खुशी की तलाश

खुशी की तलाश में दर-बदर भटकते रहे हम,
और जो घर था हमारा, उसे भी उजाड़ दिया।

7. वक्त का सितम

वक्त का सितम ऐसा है, क्या बताएं आपको,
भरे हुए बाग को भी पल भर में उजाड़ देता है।

8. प्रेम की कहानी

मेरी प्रेम कहानी का अंजाम कुछ ऐसा हुआ,
हमने मिलकर जिस गुलशन को बसाया था, वो उजाड़ गया।

9. खामोशी का शोर

खामोशी का शोर कभी-कभी इतना गहरा होता है,
कि सारे शहर को अपने अंदर उजाड़ देता है।

10. तन्हाई का बसेरा

तन्हाई का बसेरा अब कुछ ऐसा हो गया है,
हर महफिल भी अब मुझे उजाड़ सी लगती है।

11. उम्मीदों का टूटना

उम्मीदों का महल जब रेत की तरह बिखरता है,
सारी दुनिया ही तब उजाड़ सी लगती है।

12. रिश्तों की कीमत

रिश्तों की कीमत वो क्या जानेगा,
जिसने बस आते-जाते दिलों को उजाड़ दिया।

13. दर्द का मंजर

दर्द का मंजर कुछ ऐसा था, कि देखा न गया,
मेरे हंसते-खेलते घर को पल में उजाड़ दिया।

14. खुशी की लहर

खुशी की लहरें अब मुझ तक आती नहीं,
गमों ने मेरी हर गली को उजाड़ रखा है।

15. रात का सफर

रात का सफर अब भी मेरी आंखों में है,
सवेरे की किरण ने मेरे ख्वाबों को उजाड़ दिया।

16. तड़पते अरमान

तड़पते अरमानों को अब कहां छुपाऊं मैं,
इस बेवफा दुनिया ने मेरी हर खुशी को उजाड़ दिया।

17. यादों का डेरा

यादों का डेरा अब भी मेरे साथ चलता है,
मगर वो राहें अब बिल्कुल उजाड़ लगती हैं।

18. बाग़ का माली

बाग़ का माली बनकर जिसे मैंने सींचा था,
आज उसी ने मेरे गुलशन को उजाड़ दिया।

19. जिंदगी का सफर

जिंदगी का सफर अब कुछ ऐसा हो गया है,
जहां से गुजरे, वो रास्ता भी उजाड़ हो गया है।

20. टूटे हुए सपने

टूटे हुए सपने आंखों में ही रह गए,
इस बेदर्दी ने मेरे हर अरमान को उजाड़ दिया।

21. वफा का सिला

वफा का सिला मुझे कुछ यूं मिला,
कि मेरी सारी खुशियों को तुमने उजाड़ दिया।

22. सूखी शाखें

पतझड़ की हवाओं ने क्या गजब ढाया,
हरे-भरे दरख्तों को भी उजाड़ दिया।

23. ख्वाबों की नगरी

मेरे ख्वाबों की नगरी को तुमने क्या समझा,
पलक झपकते ही उसे उजाड़ दिया।

24. दिल का हाल

दिल का हाल किसी को बताना क्या,
जब अपने ही घर को मैंने उजाड़ पाया।

25. उम्मीदों का दामन

उम्मीदों का दामन जब छूट जाता है हाथ से,
तो हर गुलशन भी उजाड़ सा लगने लगता है।

26. बीते पल

बीते पल याद आते हैं तो आंखें भर आती हैं,
तेरी कमी ने मेरे जहां को

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