Beqas (बेकस)
बेकस दिल की दास्तान: शायरी का अफ़साना दर्द-ए-बेकस शहर में हर तरफ़ तन्हाइयों का मेला है, कोई पूछे तो सही, मेरा दिल क्यों बेकस अकेला है। ख़ामोश पुकार आँखों में नमी है, लबों पर खामोशी, हाल-ए-दिल कौन समझे इस बेकस की बेबसी। ज़िंदगी का सफर राहों में काँटे हैं, मंज़िल का पता नहीं, यह कैसा सफर है, जहाँ हर मुसाफिर बेकस सही। आसमान तले आसमान भी रोता है मेरे हाल पर कभी-कभी, मैं हूँ एक बेकस परिंदा, जिसकी कोई डगर नहीं। गहराई का दर्द दिल की गहराइयों में छुपा है एक दर्द, जिसे कोई ना समझे, ये है बेकस की सर्द आह। ...