Hijab (हिजाब)
हिजाब पर शायरी (Shayari on Hijab) पर्दे में भी है एक अलग नूर, एक अलग एहसास... चेहरे पर जब होता है हिजाब , एक अलग ही शान होती है, हर नज़र से बचकर, इसमें एक पहचान होती है। वो पर्दा है जो लाज का, वो हिजाब कहलाता है, हर एक निगाह को अपनी हद में रखना सिखाता है। खुदा की रहमत है ये, जो तुम पहनती हो हिजाब , तुम्हारी सादगी में ही छुपा है एक नया ख्वाब। नाज़ुकी का पर्दा है, आँखों में हया का नूर, हर अदा में झलकता है, जब हो सर पर हिजाब दूर। जब लहराता है हवा में तेरा खूबसूरत हिजाब , लगता है जैसे चाँद ने ओढ़ा हो कोई नया शबाब। तेरा हिजाब सिर्फ एक कपड़ा नहीं, ये तेरी इज्जत का ताज है, जो छुपाता है तुझको हर बुरी नज़र से, ये ...