Udasi (उदासी)
उदासी (Udasi) पर दिल छू लेने वाली शायरी
जब से बिछड़ा है वो हमसे, हर खुशी बेमानी हो गई,
हर पल अब तो बस एक गहरी उदासी की निशानी हो गई।
आँखों में नमी और दिल में इक अजीब सा खालीपन है,
लगता है जैसे हर बात में अब बस उदासी का ही दामन है।
रात की चादर में लिपटी, तारों सी बेजान है जिंदगी,
हर सुबह के साथ क्यों आती है ये गहरी उदासी?
तेरे जाने से जो खालीपन आया है इस दिल में,
वही तो असल में मेरी हर उदासी की वजह है।
मुस्कुराहटें तो सिर्फ ज़ाहिर करती हैं झूठे रंग,
अंदर ही अंदर तो बस पलती है एक उदासी दबंग।
शहर की भीड़ में भी खुद को तन्हा पाता हूँ,
जाने क्यों हर तरफ सिर्फ उदासी ही पाता हूँ।
वो कहते हैं वक्त भर देगा ज़ख्मों को,
मगर ये उदासी है जो जाने का नाम नहीं लेती।
हर तरफ बिखरे हैं टूटे सपनों के टुकड़े,
इन टुकड़ों में सिमटी है मेरी सारी उदासी।
इश्क में डूबे थे कभी हम भी, एक हँसी थी चेहरे पर,
अब तो बस एक ही साथी है, वो है मेरी उदासी।
मौसम बदलते रहे, लोग भी बदल गए कितने,
नहीं बदली तो बस ये मेरे दिल की उदासी।
गहरे सन्नाटे में खोई हुई है मेरी हर बात,
और हर बात में शामिल है मेरी ये उदासी।
क्या बताऊँ हाल-ए-दिल, जब कोई समझता ही नहीं,
ये उदासी है मेरी जिसे कोई बूझता ही नहीं।
रात भर जागकर गुजारता हूँ ये तन्हाई,
सुबह होती है तो फिर वही पुरानी उदासी।
कभी खिलता था मेरे दिल का चमन भी,
अब तो बस छा गई है यहाँ उदासी की घुटन भी।
हर खुशी छोटी लगती है, हर गम बड़ा लगता है,
शायद मेरी किस्मत में ही ये उदासी का पड़ाव है।
लबों पर हँसी का मुखौटा, आँखों में गहरा सा दर्द,
ये उदासी का मंजर है, मेरा हर पल का हमदर्द।
अकेलेपन की चादर ओढ़ कर सोया हूँ कब से,
मेरी हमराज बन गई है ये बेदर्द उदासी।
जिन रास्तों पर कभी खुशियाँ चला करती थीं,
आज उन्हीं पर बस ये उदासी चला करती है।
धूप में भी अब छाँव की तलाश रहती है,
जब से दिल में ये गहरी उदासी रहती है।
टूटे हुए ख्वाबों का बोझ उठाता फिरता हूँ,
अपनी हर साँस में मैं उदासी ढोता फिरता हूँ।
रंग भरे इस जहाँ में भी अब रंगत नहीं दिखती,
चारों तरफ बस एक ही शक्ल है, वो उदासी की दिखती।
दिल के हर कोने में अब अँधेरा सा है,
रोशनी की जगह बस उदासी का बसेरा सा है।
कहने को तो बहुत कुछ है, पर लब खामोश हैं,
मेरी हर चुप्पी में छुपी है ये गहरी उदासी।
तेरी यादें भी अब जख्म बन गई हैं दिल का,
हर याद के साथ आती है नई उदासी।
चाँद तारों की चमक भी अब फीकी लगती है,
जब से मेरे दिल में बसी है ये उदासी।
गुमनाम राहों पर चलते-चलते थक सा गया हूँ,
कदमों के साथ चलती है मेरी ये उदासी।
साँसों में घुली हुई है अब तो ये खामोशी,
हर धड़कन में बजती है बस उदासी की सरगोशी।
झूठे वादों और कसमें खाकर अब क्या होगा,
जब जिंदगी ही बन गई हो एक लंबी उदासी का सिलसिला।
ख्वाबों के जहाँ में भी अब नींद नहीं आती,
हर रात आँखों में बस उदासी छा जाती।
ये दिल भी कभी फूलों सा खिला करता था,
अब तो बस काँटों सा चुभती है ये उदासी।
रिश्तों की डोरें जब टूट जाती हैं, तो दर्द होता है,
फिर एक अनाम सी उदासी जिंदगी भर रोता है।
तेरी बेरुखी ने सिखाया है मुझे, जीना अकेलापन में,
हर हँसी के पीछे छुपी है अब मेरी गहरी उदासी।
ज़िंदगी की हर खुशी अधूरी सी लगती है,
जब से मेरे हिस्से में आई है ये उदासी।
गुलशन में भी फूल मुरझाए से लगते हैं,
जब दिल में बैठी हो गहरी उदासी।
कोई पूछे तो बताऊँ क्या, ये दर्द कैसा है,
मेरी हर मुस्कुराहट में छुपा है उदासी का चेहरा।
कभी तो ये रातें भी रोशनी से भरी थीं,
अब तो बस एक ही साथी है, वो है
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