Kamseen (कमसिन)
कमसिन (Kamseen) पर दिलकश शायरी नज़ाकत और अदा तेरी चाल में वो नज़ाकत, वो अदा है, क्या बताऊँ, कितनी कमसिन (कमसिन) तू बला है। फूलों सी नाज़ुक फूलों सी नाज़ुक, चाँद सी हसीं, ऐ मेरी कमसिन (कमसिन) , तू है दिलनशीं। सादगी की दिलकशी तेरी हर अदा में एक सादगी है, ये कमसिन (कमसिन) जवानी, बड़ी दिलकशी है। परी कहाँ तक जाएगी अभी तो निकली हो ज़ाहिद दुनिया में, ऐ कमसिन (कमसिन) परी, कहाँ तक जाएगी। नज़र का जादू नज़र मिलते ही दिल मेरा खो गया, उसकी कमसिन (कमसिन) अदाओं का मैं हो गया। हुस्न का परदा शर्म और हया का ये कैसा परदा, कमसिन (कमसिन) दिलबर का ये हुस्न है बड़ा। गहरा समंदर उसकी आँखों में है गहरा समंदर, कमसिन (कमसिन) सूरत, जैसे कोई सिंकदर। जवानी की हनक...