Mazaar (मज़ार)

hindi shayari, हिंदी शायरी, Mazaar (मज़ार)

इश्क़ और इबादत: मज़ार की रूहानी दास्तान

सुकून की पनाह

तेरी चौखट पे सुकून मिलता है, ऐ दिल की बात कौन समझे,
इस फ़ानी दुनिया में कहाँ मिलती है वो राहत, जो तेरे मज़ार पे है।

मरहम-ए-दिल

नज़र झुकती है, दिल को करार आता है,
हर ज़ख़्म-ए-दिल का मरहम है ये तेरा मज़ार

नूरानी रौशनी

दुआओं का सिलसिला यहाँ खत्म नहीं होता,
रोशन रहता है हमेशा ये नूरानी मज़ार

खुदा की रहमत

क्या माँगू उस खुदा से, जब सब कुछ मिल जाए,
तेरी रहमतों से भर जाए मेरा ये मज़ार

यादों की महक

हर शाम यहाँ एक नया चिराग जलता है,
तेरी यादों से महकता ये प्यारा मज़ार

दिल को करार

टूटे दिल लेकर आते हैं सब तेरी पनाह में,
सुकून का पैगाम देता है ये तेरा मज़ार

जीवन का आश्रय

ज़िंदगी की उलझनों से जब थक जाता हूँ मैं,
तेरी क़ब्र पे आकर ही मिलता है मज़ार

अज़ीम शख्सियत

अज़ीम शख्सियतों की दास्तान कहता है,
हर पत्थर, हर ज़र्दा तेरा ये पाक मज़ार

कालजयी निशान

गुज़र जाती हैं सदियाँ, मिट जाते हैं निशान,
बाकी रहता है सिर्फ तेरी रहमत का मज़ार

इश्क़ की निशानी

तेरी खामोशी में भी एक आवाज़ है,
इश्क़ की हर निशानी है ये तेरा मज़ार

समानता का प्रतीक

फकीरों और शाहों को एक ही दर्जा मिलता है,
तेरी मिट्टी में मिल जाते हैं सब, तेरा मज़ार

जन्नत की हवा

जन्नत की हवाएँ चलती हैं इस चौखट पर,
दिल को ठंडक देता है ये नूरानी मज़ार

रूहों की बस्ती

रूहों की बस्ती है, जहाँ सुकून ठहरता है,
हर आहट में मिलती है रहमत, ये मज़ार

शाश्वत जीवन

कौन कहेगा कि वो अब नहीं रहा दुनिया में,
हर धड़कन में ज़िंदा है तू, तेरा मज़ार

अकीदत की जगह

अकीदत से झुकता है सर हर आने वाले का,
दिल में जगह बना ली है तूने, ऐ मज़ार

पाकीज़गी का गवाह

मिट्टी के ज़र्रों में भी चमक नज़र आती है,
तेरी पाकीज़गी का गवाह है ये मज़ार

उम्मीदों का दिया

उम्मीदों के दिए जलाते हैं ज़ायर,
हर अरदास सुनता है ये तेरा मज़ार

सुकून का दरिया

दुनिया की रंगीनियों से दूर, एक अलग ही जहाँ है,
जहाँ सुकून का दरिया बहता है, वो तेरा मज़ार

Popular posts from this blog

सूखे पत्ते सी जिंदगी

सूखे पत्ते