Toote (टूटे)

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टूटे दिल के अल्फाज़: गहराई से भरी शायरी

टूटे ख़्वाबों की दास्ताँ

हर रात जो ख़्वाब देखा, सवेरे वो सब टूटे,
क्या पता था, अपनी किस्मत में बस आँसू ही थे घूटे।

रिश्तों का बोझ

कुछ रिश्ते थे कच्चे धागे से, छूते ही वो टूटे,
क्या करें शिकायत उनकी, जो वादे करके रूठे।

एतबार की दरार

एतबार का शीशा था वो, एक पल में टूटे हज़ार टुकड़े,
अब समेटे भी तो कैसे, हर टुकड़ा चुभता है दिल में।

सपनों की कसक

सपनों के महल थे बनाए, कब रेत की तरह टूटे,
ख़बर ही न हुई, जब अपने ही अपनों से रूठे।

दिल का मुआमला

ये दिल भी क्या चीज़ है, अक्सर टूटे फिर भी धड़के,
उम्मीद की किरण लिए, हर बार नया ख्वाब गढ़े।

ख़ामोशी की सदा

खामोशी चीखती रही, जब दिल के अरमान टूटे,
आँखों से गिरे आँसू, जब अपने ही साथ छूटे।

वादा खिलाफी

वादों के पुल थे बांधे, सब पल भर में टूटे,
कैसे करें भरोसा अब, जब हर आसरा झूठे।

आँसुओं की जुबानी

आँसुओं की जुबानी से, हर दर्द है बयाँ होता,
जब उम्मीदों के दामन, एक-एक करके टूटे

धोखे की आहट

जब धोखे की आहट हुई, दिल के अरमान टूटे,
हर राह अब लगती है वीरान, जब अपने ही रूठे।

दर्द का मंज़र

क्या मंज़र था वो, जब ख्वाहिशों के मोती टूटे,
हर ख्वाब बिखर गया, जब अपने सारे छूटे।

विश्वास की बुनियाद

विश्वास की बुनियाद पर, हर रिश्ता टिका था,
जब वो बुनियाद टूटे, तो सब कुछ ढह गया।

सफ़र की थकन

सफ़र में हमसफ़र बिछड़े, कुछ ख़्वाब भी टूटे,
मंज़िल की चाह में, हम अकेले ही फिरते।

ज़िंदगी की उलझन

ये ज़िंदगी की उलझन है, हर मोड़ पे दिल टूटे,
फिर भी मुस्कुराना पड़ता है, चाहे कितने भी हों रूठे।

संजोई यादें

कुछ यादें थीं संजोई, जो अब चुभकर टूटे,
क्या कसूर था मेरा, जो हम अपनों से छूटे।

खुशी का दामन

खुशी का दामन कब का टूटे, अब गम ही सहारा है,
अंधेरों में ही गुज़रती है रात, जब न कोई हमारा है।

प्यार की हद

प्यार की हद से गुज़रे थे, जब दिल के रिश्ते टूटे,
अब दर्द ही साथी है, जब सब सपने छूटे।

शीशे सा मन

ये शीशे सा मन था मेरा, ज़रा सी आहट से टूटे,
तुम तो ऐसे गए, जैसे सदियों के बंधन टूटे।

अधूरी कहानी

हर कहानी अधूरी रही, जब हम उनसे टूटे,
अब किसकी सुनाएं दास्ताँ, जब सुनने वाले रूठे।

वफ़ा की कसौटी

वफ़ा की कसौटी पर, अक्सर सच्चे दिल टूटे,
क्या करें हम शिकायत, जब अपने ही साथ छूटे।

ख्वाबों का बोझ

इन ख्वाबों का बोझ इतना था, कि कंधे ही टूटे,
चलते-चलते राहों में, हम अक्सर खुद से रूठे।

अहसास की मौत

जब अहसास की डोर टूटे, तो जीने का मतलब क्या,
हर सांस अब बोझ लगती है, जब पास न कोई अपना।

समर्पण का अंत

हर समर्पण व्यर्थ गया, जब दिल के तार टूटे,
क्या कहें अब किस्मत को, जब सारे सहारे छूटे।

गुज़री बातें

कुछ गुज़री हुई बातें, अब अक्सर हमें सताती हैं,
जब वो टूटे हुए लम्हे, चुपके से लौट आती हैं।

उम्मीदों का सिला

उम्मीदों का सिला ये मिला, कि हम खुद ही टूटे,
हर कदम पर ठोकर लगी, जब सपने ही रूठे।

तन्हाई का आलम

तन्हाई का आलम है, हर पल दिल टूटे,
कैसे बताएं ये हाल, जब सारे अपने छूटे।

झूठे वादे

झूठे वादों के सहारे, कितने दिल टूटे,
आज भी याद आती है, वो बातें जो झूठे थे।

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