Moat (मौत)
मौत पर शानदार शायरी गहरे एहसास और ज़िन्दगी का सच
शायरी 1: जीवन का अंत
ज़िन्दगी की धूप-छाँव में, एक दिन तो ढलना है,
मौत की राह पर, हर मुसाफ़िर को चलना है।
शायरी 2: खामोशी की पुकार
जब खामोशी आगोश में लेती है, तब क्या होता है,
कहते हैं, वो पल मौत का, हर किसी का होता है।
शायरी 3: सफ़र का अंजाम
हर सफ़र का अंजाम, एक दिन ठहर जाना है,
आख़िरकार हमें मौत की गोद में सो जाना है।
शायरी 4: सच है ये
मौत वो सच है, जिसे कोई झुठला नहीं सकता,
क़ब्र का रास्ता, कोई टाल नहीं सकता।
शायरी 5: हर ज़ी को
हर ज़ी को चखनी है, एक दिन मौत की कड़वाहट,
ये दुनिया तो बस, एक गुज़रती हुई राहत।
शायरी 6: कहाँ गुम
कहाँ गुम हुए वो लोग, जो कल तक यहीं थे,
मौत की हवा चली, और वो बे-निशान हो गए।
शायरी 7: मंज़िल-ए-आखिर
दुनिया की हर दौलत, हर शोहरत है बेमानी,
जब आए मौत की घड़ी, सब कुछ है फानी।
शायरी 8: बेखौफ़
क्यों डरता है तू मौत से, जो आनी ही है,
तू तो जी ले अपनी ज़िन्दगी, ये कहानी है।
शायरी 9: तन्हाई
जब सब छोड़ जाएँ, तब तन्हाई आती है,
और फिर, एक दिन मौत भी आ जाती है।
शायरी 10: पल भर की
ये ज़िन्दगी एक पल भर का मेला है यारों,
कब आ जाए मौत, किसने जाना है यारों।
शायरी 11: अंत और शुरुआत
मौत एक अंत नहीं, एक नई शुरुआत है,
ये तो बस रूह का, बदन से अलगाव है।
शायरी 12: हकीकत
ज़िन्दगी की हकीकत है मौत, ये मान ले,
अपने गुनाहों से पहले, अब तू पहचान ले।
शायरी 13: बेबस
कोई बेबस नहीं मौत के आगे,
ये वो दर है, जहाँ सर झुकते हैं सबके।
शायरी 14: एक ही रस्ता
आना है दुनिया में, और फिर जाना है,
मौत ही तो है, एक दिन सबको अपनाना है।
शायरी 15: शाश्वत सत्य
ना कोई साथ जाएगा, ना कोई पास रहेगा,
अकेली मौत का सफर, हर कोई सहेगा।
शायरी 16: हर साँस
हर साँस एक क़दम है, मौत की तरफ,
पर हम जीते हैं, जैसे कि अमर हों हर तरफ़।
शायरी 17: खेल है
ज़िन्दगी और मौत का, ये कैसा खेल है,
एक पल में सब ख़त्म, एक पल में सब मेल है।
शायरी 18: फितरत
ये दुनिया फानी है, फितरत में इसकी मौत है,
आख़िरत की सोच, बस यही अब दावत है।
शायरी 19: अजनबी
ना कोई अजनबी है मौत, ना कोई दूर है,
ये तो हर इंसान का, आख़िरी दस्तूर है।
शायरी 20: इंतज़ार
ज़िन्दगी है एक इंतज़ार, और मौत है अंजाम,
कौन जाने, कब आ जाए, सुबह या शाम।
शायari 21: बेखबर
हम बेखबर फिरते हैं, दुनिया की रंगीनी में,
और मौत करीब आती है, हर साँस की कमी में।
शायरी 22: आज़माइश
ये ज़िन्दगी एक आज़माइश है, मौत उसका इनाम,
कर ले नेकियाँ प्यारे, फिर हो जा आराम।
शायरी 23: फ़र्ज़
तेरा फ़र्ज़ है जीना, नेकियाँ कमाना,
फिर मौत से पहले, रब से मिल जाना।