Qabr (क़ब्र)
क़ब्र (Qabr) पर बेहतरीन शायरी
शायरी 1
तेरी यादों की आग अब भी बुझी नहीं,
मेरी रुह को जलाती है हर पल, चाहे क़ब्र (क़ब्र) में सोये हों कहीं।
शायरी 2
ज़िंदगी भर की थकान लिए अब कहाँ जाऊँ,
आखिर मिल ही गई मंज़िल, ये सुकून की क़ब्र (क़ब्र)।
शायरी 3
खुदा जाने क्या था उस शक्स की तकदीर में,
हँसता हुआ गया, सो गया अपनी क़ब्र (क़ब्र) में।
शायरी 4
मत पूछो क्या गुज़री हम पर इस दुनिया में,
बेहतर है कि अब सो जाएँगे अपनी क़ब्र (क़ब्र) में।
शायरी 5
मिट्टी का जिस्म मिट्टी में मिल ही जाएगा,
बस रह जाएगी यादें, जब क़ब्र (क़ब्र) में समा जाएगा।
शायरी 6
हर आहट पे लगता है कोई आने वाला है,
अब तो इंतजार है बस, मेरी क़ब्र (क़ब्र) बनाने वाला है।
शायरी 7
क्या फायदा ऐसी ज़िंदगी का, जो खुशियाँ ना दे,
अच्छा है कि अब आराम करें, इस ठंडी क़ब्र (क़ब्र) में।
शायरी 8
वफा की उम्मीद ना रखो इस ज़माने से,
यहाँ तो दोस्ती भी खत्म हो जाती है, क़ब्र (क़ब्र) के किनारे से।
शायरी 9
दुआ करो कि ज़िंदा रहें तो काम आएं,
वरना मरने के बाद तो क़ब्र (क़ब्र) भी बेगानी हो जाती है।
शायरी 10
जिसने भी दिल लगाया, रोया ही है आखिर,
इश्क़ की राहें ले जाती हैं सीधी क़ब्र (क़ब्र) तक।
शायरी 11
अब तो बस इंतज़ार है उस लम्हे का,
जब मेरे नाम की ईंटें लगेंगी मेरी क़ब्र (क़ब्र) पर।
शायरी 12
ज़माना कहता है, भूल जाओ उसे,
मगर कैसे भूलूं, वो तो बसती है मेरी क़ब्र (क़ब्र) के हर ज़र्रे में।
शायरी 13
ये दुनिया है फानी, इक रोज़ मिट जाएगी,
बाकी रहेगी बस तुम्हारी क़ब्र (क़ब्र) की निशानी।
शायरी 14
न जाने कितने राज़ दफन हैं इसमें,
हर क़ब्र (क़ब्र) की अपनी एक कहानी होती है।
शायरी 15
ज़िक्र मेरा हो तो आंखें नम कर लेना,
वरना क्या फायदा ऐसी ज़िंदगी का, जो क़ब्र (क़ब्र) तक ना पहुंचे।
शायरी 16
कभी फुर्सत मिले तो आ जाना,
मेरी क़ब्र (क़ब्र) पर दो फूल चढ़ा जाना।
शायरी 17
मोहब्बत थी या जुनून, अब याद नहीं,
बस इतना याद है कि उसने मुझे क़ब्र (क़ब्र) तक पहुँचा दिया।