Dhuan (धुआँ)

hindi shayari, हिंदी शायरी

धुआँ (Dhuan): रूह की गहराई से निकली शायरी

दर्द का धुआँ

ज़िंदगी की राहों में यूँ अक्सर मिलते हैं,
जब दिल जलता है तो उठता है ये धुआँ.

यादों का धुआँ

तेरी यादें आज भी मेरे दिल को जलाती हैं,
हर शाम उठता है उनकी आग से गहरा धुआँ.

इश्क़ का धुआँ

इश्क़ की आग जब जलती है सीने में,
तो आँखों से अक्सर निकलता है मीठा धुआँ.

अधूरे ख्वाबों का धुआँ

कुछ ख्वाब अधूरे रह जाते हैं ज़िंदगी में,
बनकर धुआँ आसमान में बिखर जाते हैं.

तन्हाई का धुआँ

तन्हाई की शाम में अक्सर यूँ होता है,
हर साँस से निकलता है एक उदास धुआँ.

जले हुए दिल का धुआँ

आज भी दिल जल रहा है किसी की याद में,
उसकी राख से उठता है गहरा धुआँ.

बेबसी का धुआँ

जब लबों पे खामोशी और आँखों में नमी हो,
बेबसी से उठता है खामोश धुआँ.

शहर में धुआँ

शहर की हवाओं में घुल गया है ये कैसा दर्द,
हर तरफ़ उठता है अब उदासी का धुआँ.

आशा का धुआँ

जला दी हैं सारी उम्मीदें एक रात में,
अब उठ रहा है बस आशा का काला धुआँ.

गुमनाम धुआँ

हर रात जलते हैं अरमान मेरे दिल में,
सुबह होते ही बन जाते हैं गुमनाम धुआँ.

ख़ामोश आग और धुआँ

मेरी खामोशी में भी एक आग छिपी है,
जो चुपचाप जलाती है और देती है धुआँ.

शाम का धुआँ

शाम ढले जब सूरज छुपने लगता है,
आसमान में बिखरता है एक नारंगी धुआँ.

विरह का धुआँ

तेरी जुदाई का ग़म कुछ ऐसा छाया है,
हर साँस में बसता है विरह का धुआँ.

अल्फ़ाज़ का धुआँ

जो कह ना सके वो अल्फ़ाज़ बन गए,
होंठों से निकले तो बस धुआँ बन गए.

अंतिम चिराग़ का धुआँ

जब बुझ जाता है आख़िरी चिराग़ भी,
तो उसकी याद में उठता है बस धुआँ.

रिश्तों का धुआँ

कुछ रिश्ते ऐसे जलते हैं खामोशी से,
पता भी नहीं चलता और उठ जाता है धुआँ.

रात का धुआँ

तारों भरी रात में जब चाँदनी आती है,
मेरे दिल से निकलता है यादों का धुआँ.

Dhuan (धुआँ) Dhuan (धुआँ) Reviewed by Editor on सितंबर 10, 2026 Rating: 5

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