Gor (गोर)
गोर (Gor) पर दिलकश शायरी संग्रह
ज़िंदगी की इस राह में, एक दिन तो है जाना,
आख़िरी मंज़िल है हमारी, वो गहरा गोर ठिकाना।
दुनिया की रौनकें सब, पल भर की कहानी हैं,
सच्ची हकीकत तो है, बस मिट्टी की गोर निशानी हैं।
क्या खूब सजाया है हमने, इस फ़ानी दुनिया को,
लेकिन भूल जाते हैं, असल घर है हमारा गोर।
ग़म न कर ऐ दिल, इस दुनिया की बेवफ़ाई का,
सुकून मिलेगा आखिर, जब सो जाएंगे गोर में जा कर।
कितने आए कितने गए, सब मिट्टी में मिल गए,
क्या दौलत क्या शोहरत, सब का ठिकाना गोर है।
जब रूह परवाज़ करेगी, जिस्म ठंडा पड़ जाएगा,
तब इस ज़मीं के नीचे, इक छोटा सा गोर सजाएगा।
मिट्टी की चादर ओढ़ कर, बेफिक्र सोएगा,
दुनिया की हर मुश्किल से, जब तेरा गोर होगा।
यह दुनिया एक मुसाफ़िरखाना है, हर कोई यहां मेहमान,
आखरी ठिकाना सबका है, वो ज़मीन तले गोर का मकान।
जो गुज़र गया वो कल था, जो आएगा वो फरेब,
सच्चाई तो बस इतनी है, कि जाना है गोर के करीब।
क्यों करते हो गुरूर, इस दो दिन की ज़िंदगानी पर,
पल भर में ख़ाक हो जाओगे, जब मिलोगे गोर की निशानी पर।
हसीन चेहरे, दिलकश अदाएं, सब धूल में मिलेंगी,
गोर की गहराई में, बस तेरी रूह रहेगी।
कोई रोएगा कोई हंसेगा, जब दुनिया से जाओगे,
लेकिन अकेले ही जाओगे, जब गोर में समाओगे।
क्या लेके आए थे क्या लेके जाओगे,
सिर्फ़ अच्छे कर्म ही होंगे, जो गोर में काम आएंगे।
मत दौड़ ऐ इंसान, इस फ़ानी दुनिया के पीछे,
एक दिन तो जाना है, तुझे गोर की गली में।
जिस मिट्टी से बने हो, उसी में मिल जाना है,
गोर है तेरा इंतज़ार, लौट कर आना है।
क्यों इतना परेशान है, इस ज़मीं के मसलों में,
एक दिन तो सोना है, तुझे अपने गोर के घोंसलों में।
फ़रिश्ते आएंगे सवाल करेंगे, क्या लेके आया बंदे,
ख़ाली हाथ जाओगे, जब गोर में मिलोगे।
यह दुनिया एक सरसराय है, जिसमें सब मुसाफ़िर,
आखिर में सबका ठिकाना, एक छोटा सा गोर है आखिर।
कितना भी भाग लो, कितनी भी दौलत कमा लो,
गोर तक ही है राह तुम्हारी, फिर क्या करोगे?
भूल गए सब गिले-शिकवे, जब दुनिया छोड़ी,
गोर की चुप्पी में, हर आवाज़ खो गई।
कहां गया वो प्यार, कहां गई वो बातें,
सब दफन हो गईं, जब गोर की रातें आईं।
मुश्किलें क्या हैं, आसानियां क्या हैं,
सब खत्म हो जाएंगी, जब गोर में जाओगे।
यह ज़िन्दगी की दौड़, कब तक चलेगी,
जब गोर बुलाएगा, सब थम जाएगी।
हर शय फ़ानी है, हर शय मिटने वाली है,
बाकी है बस खुदा, और ये गोर की कहानी है।
कर लो जो करना है, वक़्त कम है बहुत,
गोर की मंज़िल तक ही है, ये ज़िंदगी की हद।
दुनिया की हर सुबह, शाम में ढल जाएगी,
गोर की खामोशी में, हर आवाज़ मर जाएगी।
रिश्ते-नाते, सब छूट जाएंगे यहीं पर,
अकेले ही जाओगे, अपने गोर की डगर पर।
जिस दिन बंद होंगी आंखें, थम जाएगी धड़कन,
उस दिन होगा तेरा, गोर में पहला दर्शन।
यह दौलत, यह शोहरत, सब मिट्टी हो जाएगी,
जब गोर की तन्हाई, तुझको बुलाएगी।