मिट्टी (Mitti) पर दिल को छू लेने वाली शायरियां
पहला नज़राना
ज़िंदगी की हकीकत है, हम सब Mitti (मिट्टी) के बने हैं,
आख़िर में इसी में मिल जाना है, ये कायनात के सबक हैं।
रूह का सुकून
जब बारिश की बूँदें गिरती हैं, Mitti (मिट्टी) की खुशबू आती है,
लगता है जैसे रूह को मेरी, कोई अनमोल दावत भाती है।
माँ की ममता
बच्चों को खेलता देखूँ, Mitti (मिट्टी) में सने हुए,
याद आती है माँ की ममता, और बचपन के खोए हुए।
जड़ों से रिश्ता
कितना भी उड़ लें आसमान में, पर जड़ें तो Mitti (मिट्टी) में ही हैं,
अपनी पहचान वही है, जहाँ हमारे पुरखों की निशानी है।
सरहद की Mitti (मिट्टी)
सरहद पर जो मिट जाते हैं, वो Mitti (मिट्टी) को अमर कर जाते हैं,
उनकी शहादत की गाथाएं, हमेशा हमें याद दिलाती हैं।
किसान का जीवन
मेहनत से सींचता है किसान, हर दाने को उगाता है,
उसकी रगों में दौड़ती है, ये पवित्र Mitti (मिट्टी) की ताकत।
सांसों का आधार
इसी Mitti (मिट्टी) से उपजा है सब, इसी में समा जाना है,
सांसों का आधार यही है, यही जीवन का ठिकाना है।
हर कण में जीवन
हर कण में इसके जीवन है, हर दाने में उम्मीदें,
ये Mitti (मिट्टी) ही तो है जो, हर रोज़ नई कहानियाँ बुनती है।
अमृत समान
पानी की बूँदें पड़ते ही, ये Mitti (मिट्टी) जाग उठती है,
जीवन का अमृत बनकर, हर जीव को जीवन देती है।
अहंकार छोड़
हम भूल जाते हैं अक्सर, कि हम भी Mitti (मिट्टी) के पुतले हैं,
अहंकार किस बात का है, जब अंत में सब यहीं मिलना है।
यादों का आँगन
मेरे घर का आँगन भी, Mitti (मिट्टी) से सना हुआ था,
बचपन की यादों का वो, सबसे प्यारा ठिकाना था।
सूखा और प्यासा
जब प्यासी हो Mitti (मिट्टी), तो दिल भी तड़प उठता है,
एक बूँद पानी की आस में, हर जीव इंतज़ार करता है।
कला और Mitti (मिट्टी)
कुम्हार के हाथों में देखो, कैसे Mitti (मिट्टी) रूप बदलती है,
बेजान सी चीज़ भी देखो, कला से जान पाती है।
पहला घर
हर घर की नींव में देखो, ये Mitti (मिट्टी) ही तो समाई है,
जीवन के पहले ठिकाने से, ये हमारा रिश्ता निभाती है।
सांसों का बोझ
जब साँसें रुक जाती हैं, ये जिस्म Mitti (मिट्टी) हो जाता है,
बस यादें ही रह जाती हैं, जो दिल में बस जाती हैं।
नया सवेरा
रात की ओस में भीगी, सुबह की Mitti (मिट्टी) चमकती है,
हर नए दिन की शुरुआत में, एक नई उम्मीद जगती है।
अहसानमंद
ये Mitti (मिट्टी) का हम पर कितना अहसान है, क्या बताएं,
इसी के दम पर जीते हैं हम, इसी के गीत गाएं।
मूरत और Mitti (मिट्टी)
देवता की मूरत भी देखो, इस Mitti (मिट्टी) से ही बनती है,
कितनी पवित्र है ये, जो हर रूप में ढलती है।
सरल जीवन
जिनके पाँव जमीं पर हैं, वो Mitti (मिट्टी) से जुड़े रहते हैं,
सादा जीवन जीते हैं, और खुशियों से भरे रहते हैं।
यादें
उस गाँव की पगडंडी, आज भी याद आती है,
जहाँ Mitti (मिट्टी) की खुशबू, मन को महका जाती है।
जीवन का सार
जन्म से मृत्यु तक का सफ़र, Mitti (मिट्टी) से ही जुड़ा है,
यही जीवन का सार है, यही सत्य सबसे बड़ा है।
खुशहाल खेत
लहलहाते खेतों को देखो, Mitti (मिट्टी) की देन हैं ये,
हरे-भरे पौधे मुस्कुराते हैं, जीवन देते हुए।
नश्वर शरीर
क्या मान गुमान है इस शरीर का, ये तो Mitti (मिट्टी) का बना है,
एक दिन इसी में मिल जाना है, ये अटल सत्य सना है।
पवित्र स्पर्श
बच्चों के नंगे पाँव का, Mitti (मिट्टी) से कैसा रिश्ता है,
हर स्पर्श में मासूमियत है, हर खेल एक करिश्मा है।
रंगों में Mitti (मिट्टी)
गेरू रंग की Mitti (मिट्टी), दीवारों पर सजती है,
देहाती कला का वो रूप, मन को मोह जाती है।