Raakh (рах)
जली हुई उम्मीदों की राख (राख)
दर्द-ए-दिल की दास्तान
अधूरे ख्वाबों की राख
मोहब्बत की आग में जलकर, सब कुछ मिट गया,
बची है बस अब अधूरे ख्वाबों की राख.
यादों की राख
दिल के आंगन में बिखरी है यादों की राख,
हर कण में छिपी है एक अनकही दास्ताँ.
दिल की राख
कहने को तो बहुत कुछ था, पर अब कुछ नहीं,
सिर्फ मेरे जले हुए दिल की राख है बची हुई.
इश्क़ की राख
इश्क़ की आग ने सब कुछ जला दिया,
अब तो बस उसकी यादों की राख बची है.
टूटे सपनों की राख
क्या बताएँ कैसे टूट गए सब सपने,
बस बची है अब टूटे सपनों की राख.
वफ़ा की राख
जला दी उसने मेरी सारी वफ़ा,
छोड़ गया बस बेवफाई की राख.
अहसासों की राख
जिन अहसासों को हमने संजोया था,
आज वही बन गए हैं ठंडी राख.
उम्मीदों की राख
कब तक संजोता उन उम्मीदों को मैं,
जिनका अंजाम था सिर्फ राख होना.
अश्कों की राख
रो-रो कर मेरे अश्क भी सूख गए,
बचा है बस अब गम की राख.
ज़िंदगी की राख
ज़िंदगी की आग में जलकर थक गए,
अब तो बस सुकून की राख चाहिए.
दिए की राख
जलकर बुझ गए सारे अरमानों के दिए,
बाकी है बस अब उनकी काली राख.
रिश्तों की राख
वक़्त की आंच ने जला दिए सारे रिश्ते,
अब तो बस बिखरी पड़ी है उनकी राख.
तन्हाई की राख
दिल के वीरान कोने में बैठी है तन्हाई,
साथ में लिए हुए उसकी गहरी राख.
आहों की राख
जो आहें भरी थीं हमने उसकी जुदाई में,
आज वही बन गई हैं बस राख की ढेरी.
अस्तित्व की राख
मिट गया मेरा सारा अस्तित्व इस दुनिया से,
बची है अब सिर्फ मेरे होने की राख.
प्रेम की राख
जिस प्रेम को हमने पूजा था कभी,
आज वही बन गया है ठंडी राख.
खुशियों की राख
कहां गुम हो गईं मेरी सारी खुशियां,
उनकी तो अब बस राख ही बची है.
अंगारों की राख
जो अंगारे कभी सीने में धधकते थे,
आज वे बन गए हैं ठंडी राख.
जिस्म की राख
एक दिन ये जिस्म भी राख में मिल जाएगा,
क्या बचेगा तब इस फानी दुनिया में?
सुलगती राख
अभी भी सुलग रही है मेरे दिल में,
तेरी यादों की ये ठंडी राख.
सांसों की राख
हर सांस के साथ जलता रहा मैं,
बची है बस अब सांसों की राख.
अरमानों की राख
न जाने कितने अरमान जलाए मैंने,
समेटा है बस उनकी अधूरी राख.
जलते हुए की राख
जलते रहे पर बुझे नहीं कभी हम,
बस बची है अब हमारे जलते हुए की राख.
ख़ामोशी की राख
चीखती रही मेरी रूह अंदर ही अंदर,
और बाहर जमा हो गई ख़ामोशी की राख.
बीते कल की राख
छोड़ दो उसे जो अब बीत गया,
क्या रखोगे समेटकर बीते कल की राख?
इंतज़ार की राख
एक उम्र गुज़र गई इंतज़ार में,
हाथ आया बस इंतज़ार की राख.
अहंकार की राख
जल जाएगा एक दिन सारा अहंकार,
बचेगी बस इंसानियत की राख.