Soz (सोज़)
सोज़ -ए-दिल की गहराइयाँ: शायरी संग्रह शायरी 1: ज़िंदगी भर की तन्हाई का हासिल क्या है, सिवाए इस सोज़ -ए-निहाँ के, और हासिल क्या है। शायरी 2: दिल में इक उम्र से जो दर्द का आलम है, ये सोज़ -ए-इश्क़ है या कोई गहरा ग़म है। शायरी 3: तेरी यादों का हर लम्हा, मेरी जानिब आया, साथ ले आया मेरे दिल का यह सोज़ -ए-जुदाई। शायरी 4: हर एक आँसू में छिपी है, दास्तान-ए-ग़म, कौन समझे इस दिल का, ये गहरा सोज़ -ए-पस-ए-पर्दा। शायरी 5: महफ़िलें तो सजीं, पर दिल मेरा तन्हा रहा, इस सोज़ -ए-दरूँ को कोई समझ न सका। शायरी 6: इश्क़ ने क्या-क्या न दिए, ये दाग़-ए-दिल, रह गया बस सीने में, यह सोज़ -ए-मुसलसल। शायरी...