Jalan (जलन)
जलन (Jalan) पर दिल को छू लेने वाली शायरी
शायरी 1
उनकी कामयाबी देख कर, क्यों दिल में उठी है आग,
ये कैसी है जलन, जो जला रही मेरा ही चिराग।
शायरी 2
हर शख्स की तरक्की पे, क्यूँ ये दिल घबराता है,
जलन की आग में खुद को, रोज वो जलाता है।
शायरी 3
तेरी खुशी से मेरी आँखें, क्यों नम होने लगी हैं,
क्या ये जलन ही है, जो मुझमें पलने लगी है?
शायरी 4
दुआ करता हूँ रब से, ये आग बुझ जाए दिल की,
बहुत बुरी है ये जलन, जो खा जाती है खुशियाँ सभी की।
शायरी 5
अंधेरी रात में जुगनू को देखा, वो भी चमक रहा था,
मेरी जलन का असर है, मैं अकेला ही धधक रहा था।
शायरी 6
जो हासिल नहीं हुआ, उस पर क्यों उदास होते हो,
जलन के काँटे बोकर, खुद को क्यों चुभाते हो।
शायरी 7
सूरज की रोशनी से भी, जिन्हें महसूस होती है चुभन,
उनकी जिंदगी में सदा, रहती है दिल की जलन।
शायरी 8
किसी की हंसी पर भी, जब आँखें लाल हो जाएँ,
समझ लेना ये जलन है, जो रिश्तों को खा जाए।
शायरी 9
कब तक दूसरों की राहों में, काँटे बिछाते रहोगे,
ये जलन एक दिन तुम्हें भी, उसी आग में जला देगी।
शायरी 10
तराजू पर तोलते रहे, हर एक की खुशियों को,
अपनी जलन से खो दिया, अपने ही अरमानों को।
शायरी 11
वो आगे बढ़ रहे हैं, तुम पीछे छूट रहे हो क्यों,
ये जलन नहीं, बल्कि तुम्हारी कोशिशें हैं जो कम हैं।
शायरी 12
बुझा लो ये आग, जो दिल में सुलग रही है,
जलन से कभी किसी की, तकदीर नहीं बदलती है।
शायरी 13
रंगों से भरी दुनिया में, क्यों तुम काले होते जा रहे हो,
जलन की स्याही से अपनी ही, किस्मत लिख रहे हो।
शायरी 14
उनकी मुस्कान भी तुम्हें, जब खंजर लगे,
समझ लेना ये जलन है, जो अंदर ही अंदर तुम्हें लगे।
शायरी 15
जलन की आग में जलकर, राख भी हो जाओगे,
फिर भी दूसरों की खुशियों को, कभी छू ना पाओगे।
शायरी 16
रूह को जला रही है, ये तेरी अंदरूनी आग,
छोड़ दे अब ये जलन, और बन जा सबका हमराज़।
शायरी 17
किस्मत का खेल है ये, किसे क्या मिल गया,
क्यों जलन से खुद को, तूने बेनकाब कर दिया।
शायरी 18
हर उगते सूरज को देख, क्यों दिल में धधक उठती है आग,
ये कैसी जलन है, जो छीन लेती है हर एक सुहाग।
शायरी 19
उनकी कामयाबी का जश्न, तुम क्यों नहीं मनाते हो,
अपनी जलन की दीवारें, खुद ही क्यों बनाते हो।
शायari 20
जलन की बीमारी से, कोई बच नहीं पाता है,
जो इसमें गिर गया, वो खुद को ही मिटाता है।
शायरी 21
क्यों दूसरों की तरक्की पे, तेरी आँखें नम होती हैं,
ये जलन की आग ही तो है, जो खुशियाँ कम करती है।
शायरी 22
अगर जलन छोड़ दे, तो दिल में सुकून आ जाए,
तेरी जिंदगी में भी फिर, खुशियों का रंग छा जाए।
शायरी 23
उनकी सफलता पे, गर तुम भी खुश हो जाओ,
तो जलन की दीवारों को, कभी न बना पाओ।