नज़ाकत भरी शायरी
तेरी हर अदा में है वो नज़ाकत (नज़ाकत), जो दिल को छू जाए, नज़र उठाए भी तो क़यामत सी ले आए।
फूलों सी कोमलता, साँसों में खुशबू, तेरी नज़ाकत (नज़ाकत) ही तो है, मेरे महबूब।
अल्फाज़ भी शर्मा जाएँ, तेरी चाल की नज़ाकत (नज़ाकत) देख कर, जैसे कोई ग़ज़ल चल पड़ी हो, चुपके से दिल में उतर कर।
चाँद में भी नहीं वो नूर, जो तेरी नज़ाकत (नज़ाकत) में है, हर एक अदा में तेरी, एक अलग ही रंगत है।
तेरी आँखों की गहराई, लबों की वो नज़ाकत (नज़ाकत), हर साँस में बसी है, तेरी चाहत, तेरी इनायत।
छू ले जो हवा तुझको, तो वो भी इठलाए, तेरी नज़ाकत (नज़ाकत) पे तो कुदरत भी सर झुकाए।
लफ़्ज़ों में कैसे बयान हो, तेरी नज़ाकत (नज़ाकत) का आलम, तू तो ख़ुद एक मुकम्मल ग़ज़ल है, मेरा दिलकश सनम।
हर बात में तेरी मिठास, हर अंदाज़ में नज़ाकत (नज़ाकत), तू है एक ऐसा अफ़साना, जिसकी हर पंक्ति है इबादत।
कभी रेशमी ख़्वाबों में, कभी महकी हवाओं में, तेरी नज़ाकत (नज़ाकत) का जादू है, मेरी हर दुआओं में।
खुदा ने तराशा है तुम्हें, बड़ी नज़ाकत (नज़ाकत) के साथ, तभी तो तुम बन गई हो, मेरे जीने की हर बात।