Nazaakat (नज़ाकत)
नज़ाकत भरी शायरी तेरी हर अदा में है वो नज़ाकत (नज़ाकत) , जो दिल को छू जाए, नज़र उठाए भी तो क़यामत सी ले आए। फूलों सी कोमलता, साँसों में खुशबू, तेरी नज़ाकत (नज़ाकत) ही तो है, मेरे महबूब। अल्फाज़ भी शर्मा जाएँ, तेरी चाल की नज़ाकत (नज़ाकत) देख कर, जैसे कोई ग़ज़ल चल पड़ी हो, चुपके से दिल में उतर कर। चाँद में भी नहीं वो नूर, जो तेरी नज़ाकत (नज़ाकत) में है, हर एक अदा में तेरी, एक अलग ही रंगत है। तेरी आँखों की गहराई, लबों की वो नज़ाकत (नज़ाकत) , हर साँस में बसी है, तेरी चाहत, तेरी इनायत। छू ले जो हवा तुझको, तो वो भी इठलाए, तेरी नज़ाकत (नज़ाकत) पे तो कुदरत भी सर झुकाए। लफ़्ज़ों में कैसे बयान हो, तेरी नज़ाकत (नज़ाकत) का आलम, ...