Manana (मनाना)
मनाना (Manana): दिल की गहराइयों से शायरी 1 रूठे हुए दिल को, हम रोज़ मनाना (मनाना) चाहते हैं, जो ख़फ़ा है हमसे, उसे प्यार से बुलाना चाहते हैं। शायरी 2 ज़िंदगी की उलझनों में, खुद को कभी मनाना (मनाना) भी ज़रूरी है, कुछ पल अपने लिए, खुशियों से सजाना भी ज़रूरी है। शायरी 3 हर छोटी बात पर, तुम रूठ जाते हो हमसे, कितनी मुश्किल है हर बार, तुम्हें मनाना (मनाना) । शायरी 4 कोई रूठा है अगर, तो उसे जा कर मनाना (मनाना) सीखो, रिश्ते अनमोल होते हैं, ये बात तुम जानना सीखो। शायरी 5 जब रूठ जाए किस्मत भी, तो खुद को मनाना (मनाना) पड़ता है, गिर कर उठना पड़ता है, फिर से मुस्कुराना पड़ता है। शायरी 6 कभी-कभी अपनों को, थोड़ा सा मनाना (मनाना) पड़ता है, प्यार के धागे कमज़ोर न पड़ें, इसलिए झुकाना पड़ता है। शायरी 7 रूठने का हक़ है तुम्हे...