Sannaata (सन्नाटा)

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खामोशी का अफ़साना: सन्नाटा (Sannaata) पर दिलकश शायरी

खामोशी की गहराइयाँ

रात की चादर में लिपटी खामोशी,
दिल में गहराता है हर पल सन्नाटा

हर आहट से दूर

शहर की भीड़ में भी वो महसूस होता है,
अजीब सा ये दिल का सन्नाटा

अकेलेपन का साथी

जब कोई नहीं होता साथ देने को,
तब मेरा हमदम बनता है ये सन्नाटा

शब्दों के परे

कुछ बातें अनकही रह जाती हैं,
उन्हीं में घुल जाता है मेरा सन्नाटा

टूटे ख्वाबों की दास्तान

टूटे हुए ख्वाबों का शोर कैसा हो,
बस खामोशी, बस एक गहरा सन्नाटा

यादों का बसेरा

गुजरी यादों के गलियारों में,
आज भी बोलता है ये सन्नाटा

अधूरी कहानियाँ

जिन कहानियों का कोई अंत नहीं,
उनका ही दूसरा नाम है सन्नाटा

आत्मा की पुकार

भीतर की आवाज़ को सुनना हो तो,
ज़रूरी है थोड़ा गहरा सन्नाटा

प्रेम में विरह

जब बिछड़ जाए कोई अपना,
तब चीख उठता है दिल का सन्नाटा

शांति का प्रतीक

दुनिया के शोर से जब थक जाता है मन,
तब शांति देता है ये सन्नाटा

गुमनामी का आलम

कभी-कभी गुमनामी भी अच्छी लगती है,
जब घेर लेता है गहरा सन्नाटा

खामोश रातें

इन खामोश रातों में, तारों की छाँव में,
लिपटा रहता है मेरा सन्नाटा

भीड़ में अकेलापन

हज़ारों की भीड़ में भी वो महसूस होता है,
रूह का ये गहरा सन्नाटा

दिल की आवाज़

ये सन्नाटा ही तो है, जो सुनवाता है,
दिल की हर अनकही आवाज़।

इंतज़ार की घड़ी

पल-पल लम्हों का जब इंतज़ार हो,
तब और गहरा होता है सन्नाटा

पुरानी गलियाँ

जिन पुरानी गलियों में कभी चहल-पहल थी,
आज वहाँ बस बिखरा है सन्नाटा

खामोश आँसू

जब आँसू भी सूख जाते हैं आँखों में,
तब हृदय में बसता है ये सन्नाटा

विचारों का बसेरा

जहाँ विचारों की भी कोई गूँज न हो,
वही तो है मेरे मन का सन्नाटा

अधूरे वादे

हर अधूरे वादे की तरह,
बेशुमार फैला है ये सन्नाटा

दिल के राज़

किसी से न कहे गए दिल के राज़,
छुपाये बैठा है गहरा सन्नाटा

अकेलेपन की आहट

दूर कहीं जब कोई नहीं होता,
तब सुनाई देती है सन्नाटा की आहट।

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