Suna (सूना)

hindi shayari, हिंदी शायरी

सूनापन दिल की गहराइयों से: शायरी का अद्भुत संग्रह

दिल की बस्ती

आज भी दिल की बस्ती, यूँ ही सूना पड़ा है,
कोई आए तो सही, यहाँ इंतज़ार खड़ा है।

तेरी याद में

तेरी याद में हर शाम, महफ़िल भी सूना लगता है,
अब तो चाँद भी बिना तेरे, अधूरा सा लगता है।

शहर की गलियाँ

शहर की गलियाँ भी आज, कितनी सूना लगती हैं,
बिना तेरे ए हमदम, सारी फ़िज़ाएँ रोती हैं।

ख़ुशियों का रंग

खुशियों का रंग भी अब, बे-रंग और सूना है,
ज़िन्दगी का हर पल, जैसे कोई अधूरा अफ़साना है।

मौसम का मिज़ाज

मौसम का मिज़ाज भी आज, कितना सूना है,
लगता है जैसे दिल में, कोई गहरा सा कोना है।

हर राह

हर राह, हर डगर, अब तो सूनापन दिखलाती है,
तेरी यादों की परछाई, बस मुझे सताती है।

नैनों से

नैनों से नींदें रूठीं, और दिल कितना सूना है,
हर पल तेरी चाहत का, एक मीठा सा ज़ख्म है।

ख़ामोश रातें

ख़ामोश रातें और ये तन्हाई, सब कुछ सूना लगता है,
तेरी आवाज़ बिन, हर नग़मा भी अधूरा सा लगता है।

मेरा जहाँ

मेरा जहाँ तेरे बिना, कितना सूना हो गया है,
हर खुशी हर पल, जैसे कहीं खो गया है।

फूलों की महक

फूलों की महक भी आज, बेअसर और सूना है,
गुलशन की हर कली, तेरे बिन बेगाना है।

परिंदों का गीत

परिंदों का गीत भी आज, कितना सूना लगता है,
लगता है जैसे दिल का, हर कोना उदास है।

रिश्तों की डोर

रिश्तों की डोर भी अब, ढीली और सूना है,
हर बात में अब तो, सिर्फ़ फ़ासलों का रोना है।

हर सपना

हर सपना, हर ख्वाब, अब तो सूना लगता है,
कैसे बताऊँ तुम्हें, दिल कितना अधूरा सा लगता है।

सुबह की किरण

सुबह की किरण भी अब, फीकी और सूना है,
बिना तेरे ए हमदम, हर दिन एक नया रोना है।

हँसी की गूँज

हँसी की गूँज भी अब, खामोश और सूना है,
तेरी यादों में खोया, हर लम्हा सलोना है।

बाग़-ए-हयात

बाग़-ए-हयात मेरा, तेरे बिन सूना है,
रौनकें सब गुमशुदा, हर कोना विरूना है।

महफ़िल का शोर

महफ़िल का शोर भी अब, एक शोर-ए-सूना है,
हर चेहरा अंजान सा, हर रिश्ता बेगाना है।

राहों का सफ़र

राहों का सफ़र भी अब, कितना सूना लगता है,
हर मोड़ पर बस तेरा, इंतज़ार सताता है।

चाहत का दिया

चाहत का दिया भी अब, बुझा-बुझा और सूना है,
ज़िन्दगी का हर पल, जैसे किसी का रूना है।

हर मुस्कान

हर मुस्कान मेरी, अब तो बे-जान और सूना है,
तेरी यादों का साया, हर पल घेरे रहता है।

रात का आँचल

रात का आँचल भी अब, कितना सूना है,
सितारे भी चुपचाप, जैसे कोई ख़ज़ाना है।

उम्मीद का दामन

उम्मीद का दामन भी अब, कितना सूना है,
तेरी यादों के सिवा, कुछ भी अपना नहीं है।

दिल का आलम

दिल का आलम भी आज, कितना सूना है,
आँखों में नमी है, और लबों पे फ़साना है।

हर आहट

हर आहट पे लगता है, तू ही आया है,
फिर ये दिल मेरा, क्यूँ इतना सूना है।

सितारों की चमक

सितारों की चमक भी अब, फीकी और सूना है,
रात की हर गहराई में, तेरा ही फ़साना है।