Ashk (अश्क)
अश्क (Ashk): दर्द और एहसास की गहराइयाँ
लबों पर तबस्सुम, मगर आँखों में नमी है,
कहने को तो सब है, पर तेरी कमी है, और बहते हैं मेरे अश्क।
हर रात तन्हाई में तारे गिनते रहे,
ज़िंदगी की हकीकत से हम भी डरते रहे, और छलके अश्क।
वो कहते थे, कभी जुदा न होंगे हम,
आज उन्हीं की याद में बहते हैं अश्क बेगम।
क्या खूब कहा था किसी ने, वक़्त बेवफ़ा होता है,
हमने भी खोया है सब कुछ, और हर रात अश्क रोता है।
तेरे जाने के बाद, दिल वीरान सा है,
हर धड़कन में तेरा नाम है, आँखों में अश्क का सैलाब सा है।
कौन कहता है कि सिर्फ़ दर्द में रोते हैं,
खुशी के लम्हों में भी तो अश्क बहते हैं।
रिश्तों की डोर बड़ी नाज़ुक होती है,
ज़रा सी बात पर ही बिखर जाती है, और आँखों में भर जाते हैं अश्क।
हर चेहरे के पीछे एक कहानी होती है,
कुछ अनकहे अल्फ़ाज़, कुछ छुपी हुई ज़ुबानी होती है, और ढुलकते अश्क।
ज़िंदगी का हर पल इम्तिहान सा है,
कभी खुशी, कभी गम, और कभी अश्क का गुमान सा है।
तेरी यादों में हम खोए रहे रात भर,
सुबह हुई तो देखा, अश्क सूखे रहे पलक भर।
ये ज़माना पत्थर दिल है, क्या समझेगा दर्द मेरा,
मेरे अश्क ही गवाह हैं, हर रात का पहरा।
मुस्कुराने की कोशिश में थक जाता हूँ,
पर तेरे गम में अक्सर अश्क बहाता हूँ।
दर्द जब हद से गुज़र जाता है,
तो खामोशी चीख उठती है, और अश्क बन के बिखर जाता है।
कुछ राज़ ऐसे होते हैं, जो बताए नहीं जाते,
बस आँखों से बहते हैं अश्क, और छुपाए नहीं जाते।
ज़िंदगी की किताब में, हर पन्ना नया है,
कभी हँसी है, कभी गम, और कभी अश्क से भरा है।
प्यार में अक्सर दिल टूट जाते हैं,
पर उनके अश्क कहाँ सूख पाते हैं।
ये रातें भी कितनी अजीब होती हैं,
ख़्वाबों में आती है तू, और हकीकत में अश्क पीती हैं।
हर एक अश्क में छुपी है एक दास्तान,
जिसे सुन सके वही, जिसका दर्द हो एक समान।
तेरी बेरुखी ने दिल को तोड़ दिया,
अब तो मेरे अश्क भी बहना छोड़ दिया।
ये खामोशी गवाह है मेरे दर्द की,
वरना अश्क तो कब के बयां कर देते हाल-ए-दिल की।
गमों की बारिश में भी मुस्कुराता हूँ,
क्यूंकि मेरा अश्क मेरी ताकत है, जिसे मैं छुपाता हूँ।
हर आँसू में तेरा नाम है शामिल,
मेरे अश्क तेरी यादों के हैं कायल।
दिल में दबा दर्द अब कहाँ रुकेगा,
जब आँखों से अश्क बन के छलकेगा।
तेरी बेवफ़ाई का शिकवा किससे करें,
मेरे अश्क ही अब मेरी वफ़ादारी बयान करें।
ज़िंदगी ने दिए हैं ऐसे घाव,
कि अश्क ही अब हैं मेरे हमराज़ और बचाव।
महफ़िल में हँसते हैं, तन्हाई में रोते हैं,
क्या बताएँ, कितने अश्क हम हर रात बोते हैं।
कुछ रिश्ते बस नाम के होते हैं,
और उनकी याद में बस अश्क बहते हैं।
दर्द का मंज़र जब दिल में समा जाता है,
तो हर खुशी का रंग फीका पड़ जाता है, और अश्क ही सहारा बन जाता है।
जो ज़ुबान से न कह पाए, वो आँखों ने कह दिया,
मेरे अश्क ने हर राज़-ए-गम बयां कर दिया।
इश्क़ में दिल टूटना लाज़मी है,
पर इन अश्क की कीमत कोई नहीं जानता, जो बहते हैं।
ये कौन सा रिश्ता है जो टूटता नहीं,
मेरा दिल रोता है, पर अश्क सूखता नहीं।
खुशी में अक्सर मुस्कुरा देते हैं हम,
पर गम में अश्क ही होते हैं हमारे हमदम।
जब से देखा है तेरा रुख़, चाँद भी शरमाता है,
मेरी आँखों से बहता हर अश्क, तेरी यादों को दोहराता है।
दिल की गहराइयों से जो उठते हैं,
वही तो सच्चे अश्क होते हैं, जो पलकों से टपकते हैं।
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