Iztirob (इज़्तिराब)

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दिल का इज़्तिराब: गहरी बेकरारी के रंग

बेचैन दिल का हाल

दिल में इक अजीब सा इज़्तिराब है,
शायद ये बेकरारी ही मोहब्बत का जवाब है।

नींदों का चोर

रातों की नींदें, दिन का करार छीन लिया,
तेरी यादों ने कैसा इज़्तिराब दे दिया।

हर साँस में धुन

हर साँस में बस एक ही धुन सवार है,
तेरी जुदाई का इज़्तिराब बेकरार है।

रूह का सुकून

दुनिया की दौलत भी सुकून न दे सकी,
मेरे रूह में कैसा ये इज़्तिराब है।

खामोश सरगोशी

आँखों में नमी, लबों पे खामोशी,
ये इज़्तिराब तेरी यादों की सरगोशी।

लंबा इंतज़ार

जब से बिछड़े हो तुम, हर पल उदास है,
जिंदगी बन गई है एक लम्बा इज़्तिराब है।

ना खत्म होने वाली बेचैनी

ख्वाबों में भी चैन नहीं, हकीकत में भी नहीं,
ये कैसा इज़्तिराब है, जो मरता भी नहीं।

एक झलक की प्यास

तेरी एक झलक को तरसती हैं ये आँखें,
हर पल बढ़ता जाता है ये इज़्तिराब

हवाओं में घुली उदासी

हवाओं में घुली है एक अजीब सी बेचैनी,
शायद ये मेरे दिल का इज़्तिराब है।

महफिल की तन्हाई

महफिल में भी तन्हाई का आलम है,
क्या करूँ, ये दिल का इज़्तिराब है।

खुद से शिकवा

कभी खुद से भी रूठ जाता हूँ मैं,
जब भी दिल में बढ़ता है ये इज़्तिराब

तेरी यादों का असर

ज़िक्र तेरा जब भी आता है लबों पर,
दिल में उठने लगता है एक इज़्तिराब

हर शय में कमी

हर शय में मुझे तेरी कमी नज़र आती है,
इस कदर छाया है मुझ पे तेरा इज़्तिराब

नादान दिल

कौन समझाए इस नादां दिल को,
जो हरदम जीता है एक इज़्तिराब को।

सुकून की तलाश

सुकून की तलाश में दर-बदर फिरता हूँ,
लेकिन साथ चलता है मेरे इज़्तिराब

खामोश समंदर

खामोश समंदर में भी लहरें उठती हैं,
जैसे मेरे दिल में ये इज़्तिराब

चाहत का असर

तेरी चाहत का ये कैसा असर है,
हर खुशी भी लगती है इज़्तिराब

राहों के मोड़

जिंदगी की राहों में मिलते हैं कई मोड़,
पर कम नहीं होता दिल का इज़्तिराब

सुबह से शाम तक

सुबह की पहली किरण से रात के अंधेरे तक,
छाया रहता है मुझ पर तेरा इज़्तिराब

बेकरारी का एहसास

बेकरारी ने मेरे दिल को घेर लिया है,
हर सांस में महसूस होता है ये इज़्तिराब

एहसास बेमिसाल

लफ्ज़ों में बयां नहीं कर सकता ये एहसास,
जो मेरे अंदर जगाता है तेरा इज़्तिराब

जुदाई का बोझ

हर पल की जुदाई का ये बोझ भारी है,
कैसे सहूँ मैं ये लम्बा इज़्तिराब

ख्वाबों में भी जागना

तेरे ख्वाबों में भी नींद कहाँ आती है,
जब दिल में हो इतना गहरा इज़्तिराब

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