घाव (Ghaav): दिलों के गहरे ज़ख्म और उनकी दास्तान
शायरी 1: दर्दों का सिलसिला
वो कहते हैं वक्त भर देता है हर घाव,
पर कुछ निशान ऐसे होते हैं जो कभी नहीं जाते।
शायरी 2: खामोशी की ज़ुबान
ज़ुबान से न सही, आँखों से बयां होते हैं,
ये दिल के गहरे घाव, जो सहते हैं।
शायरी 3: अश्कों की कहानी
हर अश्क में छिपी है एक अनकही दास्तान,
हर घाव का अपना एक गहरा निशान।
शायरी 4: यादों की चुभन
वो यादें ही तो हैं, जो देती हैं हर पल चुभन,
भरते नहीं ये घाव, चाहे बदल जाए जीवन।
शायरी 5: वफ़ा का सिला
वफ़ा का सिला हमें कुछ यूं मिला है,
हर मोड़ पर दिल को एक नया घाव मिला है।
शायरी 6: तन्हाई का साया
तन्हाई में जब दिल रोता है चुपचाप,
गहरे होते जाते हैं सारे घाव बेहिसाब।
शायरी 7: अपनों की देन
अपनों से मिले घाव का दर्द कुछ और है,
गैरों के दिए ज़ख्म तो अक्सर भर जाते हैं।
शायरी 8: हर साँस में दर्द
हर साँस के साथ महसूस होता है ये दर्द,
दिल पर लगे घाव का नहीं होता कोई सर्द।
शायरी 9: मुस्कुराते चेहरे
चेहरे पर मुस्कान लिए फिरते हैं कई,
अंदर ही अंदर कितने घाव लिए फिरते हैं।
शायरी 10: किस्मत का खेल
ये किस्मत का ही खेल है या है कोई सज़ा,
जिंदगी ने दिए हैं हमें अनगिनत घाव खुदा।
शायरी 11: दिल की ज़मीन
दिल की ज़मीन पर अब तो बस घाव ही घाव हैं,
कभी खुशियों के फूल खिलते थे, अब सिर्फ आहें हैं।
शायरी 12: मरहम की आस
मरहम की तलाश में भटकता है दिल मेरा,
इन गहरे घाव को भर दे कोई तो ज़रा।
शायरी 13: खंजर के वार
खंजर के वार से भी गहरा होता है कभी,
जुदाई का घाव, जो भरता नहीं कभी।
शायरी 14: रूह का दर्द
ये जिस्मानी घाव तो अक्सर भर जाते हैं,
पर रूह के ज़ख्म कहाँ कम हो पाते हैं।
शायरी 15: वक्त का सितम
वक्त का सितम है कि हर रोज़ नए घाव देता है,
और हर घाव एक नई कहानी कह जाता है।
शायरी 16: हर पल का एहसास
वो घाव ही क्या, जो हर पल दर्द न दे,
वो याद ही क्या, जो हर पल तड़पा न दे।
शायरी 17: अजनबी की तरह
अब तो अजनबी की तरह जीने की आदत है,
क्या पता कब कौन दे जाए नया घाव की इबादत है।
शायरी 18: दिल की गहराई
दिल की गहराई में छिपे हैं वो घाव,
जिनकी ज़ुबान नहीं, बस खामोश आहट है।