Roona (रोना)
दिल को छू लेने वाली शायरी: रोना (Roona)
अश्कों की ज़ुबान
जब दिल में दर्द हद से गुज़र जाता है,
तब अश्कों के सिवा कुछ नहीं आता है रोना।
खामोश रातें
खामोश रातों में तेरी याद सताती है,
हर एक पल तेरी जुदाई मुझे रोना सिखाती है।
ज़ख्मों का मरहम
गहरे ज़ख्मों को कैसे भरें हम,
आँखों से बस निकलता है रोना।
तकदीर की मार
तकदीर की लिखी को कौन मिटा पाया है,
हमने हर मोड़ पर बस रोना ही पाया है।
तन्हाई का साथी
जब कोई न हो साथ तन्हाई में,
तब दिल खोल कर जी भर के रोना अच्छा लगता है।
टूटे हुए सपने
टूट गए हैं सारे सपने इस दिल के,
अब बचा ही क्या है, बस रोना और सिसकना।
दर्द का एहसास
दर्द का एहसास गहरा जब होता है,
तब आँखों से बेबस आँसुओं का रोना होता है।
बिछड़न का ग़म
बिछड़न का ग़म कुछ इस कदर है,
रात दिन बस आता है रोना, यादों में खोना।
अधूरी कहानी
मेरी अधूरी कहानी का अंजाम यही है,
आँखों में पानी और दिल में रोना ही है।
खामोशी का शोर
खामोशी का शोर जब दिल में होता है,
तब हर आहट पर रोना याद आता है।
यादों का बोझ
यादों का बोझ इतना बढ़ गया है,
कि अब हंसना भी भूल गए, बस रोना आता है।
हर खुशी बेमोल
जब खुशियाँ भी बेमोल लगने लगें,
तब हर बात पर बस रोना ही आता है।
इंतज़ार की हद
इंतज़ार की भी कोई हद होती है,
अब और नहीं, बस जी भर के रोना है।
मुस्कान के पीछे
जो मुस्कुराते हैं अक्सर, वो भी बहुत कुछ छुपाते हैं,
उनकी मुस्कान के पीछे भी अक्सर रोना होता है।
अधूरे ख्वाब
अधूरे ख्वाबों का क्या करें हम,
अब हर खुशी से लगता है बस रोना।
वफ़ा की कीमत
वफ़ा की कीमत बहुत भारी पड़ी है,
आज भी तेरी यादों में हमको रोना आता है।
बारिश का मौसम
बारिश का मौसम और तेरी यादें,
मुझे मजबूर करती हैं जी भर के रोना।
दिल की आवाज़
दिल की आवाज़ को कोई सुनता नहीं,
इसलिए मेरा दिल चुपचाप करता है रोना।
रिश्तों की डोर
जब टूट जाए रिश्तों की नाज़ुक डोर,
तब दिल में मचलता है बस रोना और शोर।
दर्द का आलम
यह दर्द का आलम अब सहा नहीं जाता,
आँखों से बस निकलता है रोना ही आता।
तड़प
तेरी यादों की तड़प अब चैन लेने नहीं देती,
हर पल मुझे बस मजबूर करती है रोना।
टूटा हुआ विश्वास
जब टूट जाता है किसी पर विश्वास,
तो फिर रह जाता है बस रोना ही खास।
गम की परछाईं
गम की परछाईं पीछा नहीं छोड़ती,
और मेरे आँखों में बस रहता है रोना।
ज़िंदगी का सफर
ज़िंदगी के इस लंबे सफर में,
कहीं खुशियाँ कम, कहीं ज़्यादा है रोना।
आंसुओं का सैलाब
कभी-कभी आंसुओं का सैलाब रुकता नहीं,
जी करता है बस सारा दिन रोना।
बिना आवाज़
बिना आवाज़ के भी जो दर्द बयां हो,
उस खामोश दर्द को कहते हैं रोना।