Barbaad (बर्बाद)

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दर्द-ए-दास्तान: जब हर चीज़ हो जाए बर्बाद

उजड़ी हुई बस्तियाँ

तेरी मोहब्बत ने हमको कुछ यूँ कर दिया,
के ख़ुद को भी हमने बर्बाद कर दिया।
न चैन आया, न करार मिला कभी,
बस तेरी यादों में ही हमने जीना सीख लिया।

ख़्वाबों का टूट जाना

जो देखे थे कभी हमने सुनहरे से ख़्वाब,
आज वो सब के सब हैं बर्बाद से।
किस्मत का खेल है या है कोई सज़ा,
बस रह गई है दिल में एक अजीब सी याद।

मोहब्बत की कीमत

मोहब्बत की राह में लुटाया सब कुछ,
और अंत में सिर्फ़ हुए बर्बाद
ये कैसा इश्क़ था, ये कैसी थी चाहत,
जिसने हमें कर दिया हर ख़ुशी से आज़ाद।

वक्त की मार

वक्त की गर्दिशों ने क्या ख़ूब सितम ढाए,
हर आरज़ू को उसने बर्बाद कर दिए।
अब तो बस एक ही तमन्ना है दिल में,
के कैसे इन टूटे हुए टुकड़ों को समेटे जाएं।

दिल का सूनसान

ये दिल भी क्या खूब था, कितना मासूम था,
तेरी एक नज़र ने इसको बर्बाद कर दिया।
अब तो बस ख़ामोशियाँ हैं और तन्हाईयाँ,
हर रिश्ते को हमने ख़ाक कर दिया।

ग़लतियों का मंज़र

अपनी ही ग़लतियों से सीखा है ये सबक,
कैसे अपने आप को हम करते हैं बर्बाद
काश लौट आए वो वक़्त, वो पल फिर से,
जब ज़िंदगी थी फूलों सी और न थे कोई विवाद।

यादों का धुआँ

तेरी यादों का धुआँ कुछ ऐसा छाया है,
हर ख़ुशी को इसने बर्बाद कर दिया है।
अब न कोई रास्ता, न कोई ठिकाना,
बस ज़िंदगी का सफ़र गमों से भर दिया है।

अधूरी दास्तान

लिखी थी जो ज़िंदगी की अधूरी दास्तान,
उसे पढ़ने से पहले ही हमने किया बर्बाद
क्या मिला इस तन्हाई और वीरानों में,
बस एक नाम, जो अब बन गया है मेरी फ़रियाद।

ख़ामोशियाँ

ख़ामोशियाँ भी अब चीखने लगी हैं,
जब से सब कुछ हुआ बर्बाद सा।
आँखों में आँसू, होंठों पे शिकवे,
ज़िंदगी का हर रंग अब है फीका सा।

सजा-ए-इश्क़

ये कैसी सज़ा मिली हमें इश्क़ में,
जो हमें पल पल करती रही बर्बाद
न जी सके, न मर सके सुकून से,
बस रह गई है एक अधूरी सी याद।

टूटे हुए रिश्ते

रिश्तों की डोर को समझा था रेशम,
पर उसने तो सब कुछ किया बर्बाद
अब न कोई शिकायत, न कोई चाहत,
बस एक दर्द है जो बन गया है मेरी इबादत।

मायूसी का साया

मायूसी का साया कुछ ऐसा है गहरा,
जिसने हर उम्मीद को किया बर्बाद
सुबह का इंतज़ार है, न शाम की ख़बर,
बस हर लम्हा है अब एक बेरंग सा फरियाद।

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