Tabah (तबाह)
तबाह (Tabah) कर देने वाली दिल छू लेने वाली शायरियाँ
तेरी यादों ने कुछ इस कदर घेरा है,
कि मेरा हर लम्हा अब मुझको तबाह लगता है।
इश्क़ की राहों में ऐसा भी मोड़ आया,
जहां हर खुशी हमको तबाह कर गई।
जो गुज़री है हम पर वो तुम क्या जानोगे,
इश्क़ ने हमें कुछ इस कदर तबाह किया।
मुहब्बत में कभी खुद को इतना न खोना,
कि उसकी यादें तुम्हें तबाह कर जाएं।
ख्वाबों का शहर जो बसाया था मैंने,
उसकी बेवफाई ने उसे तबाह कर दिया।
हर रास्ते पर सिर्फ़ उसकी ही यादें हैं,
लगता है ये दुनिया भी मुझसे तबाह हो चुकी है।
वो वक़्त भी क्या था जब हम मुस्कुराते थे,
अब तो हर हंसी हमें तबाह करती है।
दिल की गहराइयों में छुपा है वो दर्द,
जो हमें रोज़ थोड़ा-थोड़ा तबाह करता है।
क्या शिकायत करें हम किसी से अब,
जब खुद अपनी ही चाहत हमें तबाह कर गई।
समंदर की लहरों सा था मेरा सुकून,
तेरी बेवफाई ने उसे तबाह कर दिया।
मेरे घर की रौनक को किसने नजर लगाई,
कि आज हर कोना मेरा तबाह सा लगता है।
जुबां पर नाम उसका, दिल में उसकी तस्वीर,
यही तो है वो दर्द जो हमें तबाह कर रहा है।
हर आंसू में उसकी यादों का समंदर है,
जो हमें धीरे-धीरे तबाह कर रहा है।
ज़िंदगी की दौड़ में जब हम आगे बढ़े,
एक गलत कदम ने हमको तबाह कर दिया।
मेरे दिल में अब कोई हसरत नहीं,
सब कुछ तो तुमने पहले ही तबाह कर दिया।
हर रात चाँदनी भी अब चुभती है,
तेरे बगैर मेरा सारा जहाँ तबाह है।
तेरी खामोशी ने हमें मार ही डाला,
मेरी खुशियों का हर पल तबाह कर डाला।
मोहब्बत का अंजाम जो हमने देखा,
उसने हमारी रूह को तबाह कर दिया।
कोई पूछे तो बताना क्या हाल है मेरा,
तेरी यादों ने मुझे किस कदर तबाह किया।
जिन्हें खुद से ज्यादा चाहा था मैंने,
उन्हीं की नज़रों ने मुझे तबाह कर दिया।
हर रात एक नया गम मिलता है,
ये ज़िंदगी भी हमें धीरे-धीरे तबाह कर रही है।
जो सपने संजोए थे कभी आँखों में,
हकीकत ने उन सबको तबाह कर दिया।
मेरी हर दुआ में सिर्फ़ उसकी खुशी थी,
मेरी अपनी खुशियाँ उसने तबाह कर दीं।
हम तो समझे थे कि वो हमें चाहेंगे,
मगर वो तो हमारी वफ़ा को तबाह कर गए।
मेरे घर से खुदा ने रौनक हटा दी,
अब हर खुशी लगती है तबाह जैसी।
जिस उम्मीद पर जी रहे थे हम,
उस उम्मीद को तुमने तबाह कर दिया।
दिल के टुकड़े हुए इतने कि गिन न सके,
तेरी यादों ने हमें पूरी तरह तबाह किया।
कागज़ पर लिखते हैं दर्द अपना,
ये ज़िंदगी हमें हर रोज़ तबाह कर रही है।
तेरी जुदाई का असर ऐसा हुआ,
कि हर खुशी हमें तबाह लगती है।
किस-किस को बताएं दर्द अपना,
यहां तो हर कोई हमें तबाह करने को तैयार है।
आशिकी में हमने क्या-क्या न खोया,
अपना सारा वजूद ही तबाह कर दिया।
जब से तुम गए हो मेरी ज़िंदगी से,
हर ख्वाब मेरा तबाह हो गया है।
मेरे गुलशन को किसी की बददुआ लगी,
अब हर फूल मेरा तबाह सा लगता है।
"हर तबाह मंज़र में भी, एक उम्मीद की किरण होती है।"
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