Chubhan (चुभन)
दिल की चुभन: एहसासों की गहराई
दर्द की आहट
कभी लफ़्ज़ों की होती है, कभी खामोशी की,
दिल में एक गहरी चुभन महसूस होती है।
यादों का सिलसिला
तेरी यादों की हर एक किरन,
आज भी दिल में दे जाती है गहरी चुभन।
खामोश दर्द
न कहा कुछ, न सुने कुछ, पर एहसास है,
खामोशी में भी एक अजीब सी चुभन है।
अधूरी बातें
कुछ बातें जो अनकही रह गईं,
आज भी सीने में बन के चुभन रह गईं।
अफ़सोस की आग
हर अफसोस एक नया ज़ख्म देता है,
और उस ज़ख्म की चुभन हमें दर्द देती है।
टूटे ख्वाब
टूट गए वो ख्वाब जो बुने थे हमने,
उनकी हर किरन अब बन गई है चुभन।
तेरी बेरुखी
तेरी बेरुखी की हर बात दिल में उतर गई,
एक मीठी सी चुभन बन के ठहर गई।
रिश्तों की डोर
जब रिश्ते कमजोर पड़ जाते हैं,
उनकी गांठों में भी एक चुभन होती है।
इंतज़ार की धूप
इंतज़ार की धूप में जलते रहे हम,
उसकी तपिश ने दी है गहरी चुभन।
विश्वास का टूटना
जब टूटता है विश्वास का धागा,
दिल में रहती है एक कसक, एक चुभन।
अनदेखे घाव
घाव जो दिखते नहीं, पर होते हैं गहरे,
उनकी चुभन को बस दिल ही सहता है।
अतीत की परछाई
अतीत की परछाई पीछा करती है,
हर लम्हे में एक चुभन सी भरती है।
तनहाई का साथी
तनहाई में अक्सर खुद से बातें होती हैं,
हर बात में एक छोटी सी चुभन होती है।
मीठा ज़हर
कुछ रिश्ते मीठे ज़हर से होते हैं,
जिनकी हर घूँट में एक चुभन होती है।
अधूरी कहानी
हर अधूरी कहानी का एक मोड़ होता है,
जहाँ आकर एक नई चुभन होती है।
वक्त का वार
वक्त ने दिए हैं कुछ ऐसे भी वार,
जिनकी चुभन आज भी ताजा है यार।
दुआओं में भी
दुआओं में माँगी थी खुशियाँ,
पर मिली सिर्फ दिल में चुभन।
झूठी हँसी
झूठी हँसी के पीछे दर्द छुपाया,
उस दर्द की चुभन ने हमें रुलाया।
हर साँस में
हर साँस में अब घुल चुकी है वो याद,
हर पल देती है एक नई चुभन।
मौसम की तरह
मौसम की तरह बदल गए वो लोग,
उनकी बदलती अदा ने दी है चुभन।
ख्वाहिशों का टूटना
ख्वाहिशों का टूट जाना भी एक दर्द है,
हर टूटी ख्वाहिश की एक चुभन है।
जुदाई का गम
जुदाई का गम भी क्या कम था,
उसमें तेरी यादों की चुभन और बढ़ गई।
बेनाम दर्द
कुछ बेनाम दर्द होते हैं जिंदगी में,
जिनकी चुभन हमेशा महसूस होती है।
निशानियाँ
कुछ निशानियाँ छोड़ जाते हैं लोग,
जो दिल में बन जाती हैं गहरी चुभन।
अनकहे लफ्ज़
अनकहे लफ़्ज़ों का बोझ बहुत है,
हर लफ़्ज़ में एक कसक, एक चुभन है।
दिल की आवाज़
दिल की आवाज़ में भी अब वो बात नहीं,
बस एक उदासी, एक गहरी चुभन है कहीं।
रातों की नींद
रातों की नींद भी अब उड़ सी गई है,
आँखों में तेरी यादों की चुभन रह गई है।
झूठी कसमें
तेरी झूठी कसमों का भी क्या कहें,
उनकी हर बात में थी एक मीठी चुभन।
अनमोल आँसू
गिर
Comments
Post a Comment