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Faasla (फ़ासला)

hindi shayari, हिंदी शायरी

फ़ासलों की दुनिया में: दिल से दिल तक का सफ़र

जुदाई का गम

कभी सोचा न था कि ऐसे दिन भी आएंगे,
जब इतने करीब होकर भी फ़ासला बन जाएंगे।

तन्हाई का अहसास

दिल में अब एक अजीब सी तन्हाई है,
तेरे मेरे दरमियां ये कैसा फ़ासला छाई है।

वक़्त का खेल

वक़्त ने कैसे बदल दिए सारे मंज़र,
हर लम्हे में बढ़ता गया ये फ़ासला अंदर।

यादों का दरिया

यादों का दरिया भी अब गहरा हो गया,
जितना करीब थे, उतना ही फ़ासला हो गया।

चाहतों का अंत

मेरी चाहतों का अब कोई ठिकाना नहीं,
तेरे मेरे बीच में, यह कैसा फ़ासला सही।

राहों में गुम

राहें जुदा हो गईं, मंज़िल भी खो गई,
फ़ासला इतना बढ़ा कि आवाज़ भी सो गई।

तक़दीर की चाल

ये तक़दीर की चाल है या मेरी ख़ता,
बढ़ता ही जा रहा है ये फ़ासला बेवजह।

नज़रों की दूरियां

नज़रें भी अब अक्सर थक जाती हैं,
जब भी देखती हैं कोई फ़ासला पाती हैं।

ख़ामोशी का शोर

ख़ामोशियाँ भी अब शोर मचाने लगी हैं,
जब से दरमियां ये फ़ासला आने लगी हैं।

मिलन की आस

कब तक रहेगी यह मिलन की आस,
जब हर सुबह बढ़ता है नया फ़ासला पास।

तन्हा सफ़र

मेरा तन्हा सफ़र और तेरी यादों का बोझ,
कम न हुआ ये कभी भी फ़ासला हर रोज़।

धुंधली सी तस्वीर

धुंधली सी तस्वीर में दिखता है तू,
बस एक फ़ासला है जो मिटा नहीं पा रहा हूं।

लम्हों की क़ैद

हर लम्हा क़ैद है इन दूरियों में,
क्यूँ आ गया इतना बड़ा फ़ासला खुशियों में।

शिकवा नहीं

शिकवा नहीं तुझसे, न अपनी तक़दीर से,
बस हार गया हूं मैं इस फ़ासला की ज़ंजीर से।

इंतज़ार की हद

इंतज़ार की हदें भी अब मिट चुकी हैं,
तेरे मेरे बीच की ये फ़ासला कब मिटेगी।

रिश्तों की डोर

नाजुक सी डोर थी, कब टूट गई पता न चला,
और रिश्तों में आ गया ये गहरा फ़ासला

दिल की आवाज़

दिल की आवाज़ अब दिल तक नहीं जाती,
क्या इतनी बढ़ गई है ये फ़ासला की जाती।

तन्हाई का साथी

तन्हाई मेरी अब मेरी साथी बन गई है,
जब से तेरे मेरे बीच में फ़ासला बढ़ गई है।

टूटे सपने

कुछ ख्वाब टूटे, कुछ रिश्ते बिखर गए,
और हम दोनों के दरमियां फ़ासला कर गए।

अधूरा मिलन

मिलन की उम्मीदें थीं, पर सब अधूरी रह गईं,
बस बढ़ता गया ये फ़ासला, और रातें सह गईं।

खामोश जुबां

जुबां खामोश है, आँखें नम हो गई हैं,
तेरे मेरे बीच की ये फ़ासला क्या कम हो गई है।

तन्हाई का बोझ

तन्हाई का बोझ अब सहा नहीं जाता,
जब तेरे मेरे बीच का फ़ासला मिटाया नहीं जाता।

दिल के टुकड़े

दिल के टुकड़े हो गए, हर तरफ बिखरे,
क्यूंकि हम दोनों के बीच, बढ़ गए फ़ासला गहरे।

ख्वाबों का शहर

तेरे ख्वाबों का शहर अब दूर लगता है,
इस फ़ासला ने सब कुछ चकनाचूर करता है।

अधूरी बातें

अधूरी बातें, अनकहे अल्फ़ाज़ रह गए,
बढ़ते फ़ासला के साथ, दिल के राज़ बह गए।

मुहोब्बत की सज़ा

मुहोब्बत की हमें ये कैसी सज़ा मिली,
कि दिल से दिल तक भी एक फ़ासला मिली।

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