Gila (गिला)
गिला (Gila): शिकायतें, एहसास और दर्द
शिकायत-ए-दिल
कुछ ऐसा हुआ कि हमें उनसे अब कोई गिला नहीं रहा,
वो बदल गए तो क्या हुआ, हमारा प्यार तो मरा नहीं रहा।
बेवफाई का गिला
आज भी है हमें तुमसे वही पुराना गिला,
तुमने वादे किए थे बहुत, पर निभाना भूल गए।
तकदीर से गिला
क्यों मेरी तकदीर में सिर्फ तन्हाई है, ये कैसा गिला?
हर खुशी को मैंने छूकर भी, खो दिया हर शिला।
वक़्त का गिला
वक़्त का ये कैसा मोड़ है, मेरा तुमसे गिला नहीं,
पर जो साथ चलना था हमें, वो पल अब मिलता नहीं।
ख़ामोशी का गिला
लबों पे है ख़ामोशी, मगर दिल में है एक गिला,
तुमने समझा नहीं जज्बात, या समझने का किया था सिला।
अल्फाज़ का गिला
मेरे हर लफ्ज़ में छुपा था तुम्हारा नाम, ये कैसा गिला,
तुमने सुना ही नहीं, या सुनने का बहाना था किया।
मौसम से गिला
बरसात में भीगी आंखें, और दिल में है ये गिला,
तुम दूर हो, और मौसम ने भी अब छोड़ दिया सिला।
वफ़ा का गिला
हमने तो की थी वफ़ा, पर तुम्हें था हमसे गिला,
कैसे समझाते तुम्हें, मेरा प्यार कितना था खिला।
राहों का गिला
जिन राहों पर चले थे हम कभी, उनका हमें गिला है,
आज वो सुनी पड़ी हैं, जैसे कोई सपना सिला है।
चाँद से गिला
चाँद से भी आज हमें तुम्हारा ही गिला है,
तेरी तस्वीर है उसमें, पर तेरा चेहरा नहीं मिला है।
ख़ुद से गिला
अब तो हमें ख़ुद से भी है एक बड़ा गिला,
क्यूँ किया था हमने इतना इश्क़, जिसका ना मिला सिला।
दूरी का गिला
ये दूरियां भी कैसी हैं, जिनसे हमें गिला है,
तुम पास हो, पर दिल तक पहुंचना मुश्किल हुआ है।
इंतज़ार का गिला
हर शाम किया तेरा इंतज़ार, अब ये कैसा गिला,
तुम आए नहीं, और वक़्त भी ऐसे ही कटता रहा।
प्यार का गिला
जिस प्यार पे किया था इतना भरोसा, उससे है गिला,
उसने हमें तोड़ दिया, जैसे कोई टूटा हुआ सिला।
रिश्तों का गिला
टूटे हुए रिश्तों का, अब किससे करें गिला,
जो अपने थे कभी, वही बन गए अब अजनबी सिला।
नज़रों का गिला
मेरी नज़रों में तुम्हारा, अब ये कैसा गिला है,
तुम देखते ही नहीं, जैसे कोई राज़ दफ़न हुआ है।
मुस्कान का गिला
लबों पे है मुस्कान, मगर दिल में है गिला,
तुमने छीन ली खुशियां, पर चेहरे पे हँसी को सिला।
ख़्वाबों का गिला
मेरे ख़्वाबों में आकर भी, तुमने किया गिला,
जाग कर देखा तो, फिर वही तन्हाई का सिला।
यादों का गिला
तेरी यादों से है अब हमें, ये छोटा सा गिला,
क्यूँ आती हो हर पल, जब साथ हमारा नहीं मिला।
अजनबी का गिला
तुम बन गए अजनबी, अब किससे करें हम गिला,
जो अपने थे कभी, उन्होंने ही हमें ठुकरा दिया।
जवाब का गिला
जो सवाल थे मेरे, उनका ना मिला कोई जवाब, ये गिला,
तुमने खामोशी ओढ़ ली, और हमें अधूरा छोड़ दिया।
ख़ुदा से गिला
रब से भी है आज हमें, ये एक छोटा सा गिला,
क्यूँ बनाया इंसान को ऐसा, जिसका दिल है सिला।
झूठे वादों का गिला
तुम्हारे झूठे वादों से, हमें अब है ये गिला,
हर बात थी फरेब, हर कसमे थी बेवफ़ा।
दूरियों का गिला
ये दूरियाँ, ये मजबूरियाँ, इन सब से हमें गिला है,
इश्क़ तो था सच्चा, पर वक़्त ने ना दिया सिला है।
इश्क़ का गिला
हमें इश्क़ से भी आज है एक बहुत बड़ा
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