Bebasi (बेबसी)

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बेबसी (Bebasi) पर दिल छू लेने वाली शायरी

शायरी 1

जब लबों पर हंसी हो, पर दिल में हो दर्द गहरा,
ऐसी हर रात कटती है, ये कैसी बेबसी का पहरा।

शायरी 2

कहने को बहुत कुछ है, पर अल्फाज़ नहीं मिलते,
लफ़्ज़ों की इस बेबसी में, हम खुद से भी नहीं मिलते।

शायरी 3

मंज़िल करीब थी, पर रास्ता भटक गए,
क़दमों की बेबसी देखो, हम यहीं अटक गए।

शायरी 4

आंखों में नमी है, होठों पर खामोशी है,
कैसी ये बेबसी है, हर साँस में उदासी है।

शायरी 5

तकदीर से शिकायत क्या करें, जब खुद ही मजबूर हों,
यह कैसी बेबसी है, हम अपने ही नूर से दूर हों।

शायरी 6

वादे तो बहुत थे, पर निभा न सके,
इरादों की बेबसी थी, हम मुस्कुरा न सके।

शायरी 7

हाथों में था सब कुछ, पर थाम न सके,
वक्त की इस बेबसी में, हम कुछ काम न सके।

शायरी 8

रिश्तों की डोर थी, पर सुलझा न पाए,
नज़रों की बेबसी में, हम उन्हें बुला न पाए।

शायरी 9

हर ख्वाब टूटा, हर उम्मीद भी टूटी,
दिलों की ये बेबसी, अब किसे है सूझी।

शायरी 10

क्या करें शिकायत रब से, या खुद से हो सवाल,
हर तरफ फैली है देखो, कैसी बेबसी की जाल।

शायरी 11

हर मोड़ पर ज़िन्दगी ने एक नया सबक सिखाया,
हर फैसले में थी बेबसी, हमने खुद को पाया।

शायरी 12

खामोशी बोलती है, जब दिल में शोर होता है,
यह बेबसी का आलम, जब कोई और होता है।

शायरी 13

उम्मीदों के दिए जलते रहे, पर हवाएँ तेज थीं,
बुझती रोशनी की बेबसी, बस यही एक सोच थी।

शायरी 14

नज़दीकियां थी बहुत, पर फासले बढ़ गए,
रिश्तों की इस बेबसी में, हम अकेले पड़ गए।

शायरी 15

पलकों तले नींद थी, पर सो न पाए कभी,
अरमानों की बेबसी ने, जगाए रखा हमें अभी।

शायरी 16

ख्वाहिशें तो बहुत थीं, पर पूरी हो न सकीं,
ज़िन्दगी की ये बेबसी, कभी कम हो न सकी।

शायरी 17

दिल के आंगन में सन्नाटा है, कोई आवाज़ नहीं,
इस बेबसी का अब कोई, इलाज नहीं।

शायरी 18

हवाओं में खुशबू थी, पर छू न सके दामन,
बहारों की बेबसी में, हम यूँ ही तरसते रहे सावन।

शायरी 19

जुबां पे ताले पड़े हैं, दिल में दर्द भरा है,
बेबसी का ये मंज़र, हर शब हरा है।

शायरी 20

सितारों से रात थी, पर नींद न आई,
तन्हाई की बेबसी में, हमने बस आहें भरी।

शायरी 21

रूठे हुए अपनों को मना भी न पाए,
बेबसी थी ऐसी कि, आंसू भी दिखा न पाए।

शायरी 22

ख्वाबों की दुनिया थी, पर हकीकत कुछ और थी,
इस बेबसी में मेरी, हर चाहत कमज़ोर थी।

शायरी 23

हर कोशिश अधूरी रही, हर आरज़ू बेजान थी,
ये कैसी बेबसी है, हर खुशी मेहमान थी।

शायरी 24

समय का पहिया चला, पर हम वहीं ठहर गए,
हालातों की बेबसी में, हम सहते रहे, न मर गए।

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