Sukoot (सुकूत)
सुकूत (Sukoot): खामोशी का अफ़साना
खामोशी की जुबां
लबों पे आई बात अक्सर बदल जाती है,
मगर दिल की सदा, सुकूत में पल जाती है।
गहराई का राज़
सागर की गहराईयाँ अक्सर शांत होती हैं,
कुछ ऐसी ही गहराइयाँ सुकूत में होती हैं।
दर्द की परछाईं
जब दिल में दर्द उठता है, तो शोर नहीं होता,
बस एक गहरा सुकूत हर तरफ़ फैल जाता है।
तन्हाई का साथी
तन्हाई में अक्सर वो मेरा हमदम बनता है,
ये गहरा सुकूत ही मेरा सच्चा साथी रहता है।
आँखों में ठहरा
आँखों में ठहरा है, लबों पर आया नहीं,
मेरे हर दर्द का सुकूत अभी तक गया नहीं।
रात का मंज़र
रात की गहराइयों में जब चाँद सो जाता है,
तब मेरा दिल सुकूत की चादर ओढ़ लेता है।
लफ्ज़ों के परे
कुछ बातें लफ्ज़ों में बयाँ नहीं होती,
बस एक गहरा सुकूत ही उन्हें कह पाता है।
इंतज़ार का आलम
पलकों पे ठहरा हुआ, दिल में छुपा हुआ,
तेरे इंतज़ार का हर पल सुकूत में बीता हुआ।
रूह की पुकार
मेरी रूह की पुकार सुन ले ऐ खुदा,
ये सुकूत भी तो एक इल्तिजा है मेरी।
ज़ख्मों का मरहम
कुछ ज़ख्म ऐसे होते हैं जो भरते नहीं,
बस एक गहरा सुकूत ही उनका मरहम बनता है।
क़िस्मत का लिखा
क़िस्मत का लिखा मिटाया नहीं जा सकता,
कभी-कभी सुकूत भी सब कुछ कह जाता है।
समंदर सा गहरा
तेरे जाने के बाद दिल समंदर सा गहरा हो गया,
हर तरफ़ बस एक खामोश सुकूत पहरा हो गया।
रूहानी रिश्ता
कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जो बोलकर नहीं बनते,
बस एक रूहानी सुकूत से ही सिमटते हैं।
आँसुओं की जुबां
आँसुओं की अपनी जुबां होती है,
उनके गिरते ही सुकूत की घटा छा जाती है।
तपस्या का फल
तपस्या का फल अक्सर खामोशी में मिलता है,
यही सुकूत हमें सच्चाई से मिलाता है।
पलकों का परदा
पलकों के पीछे छुपा एक जहाँ होता है,
वहीँ पर सुकूत का गहरा निशान होता है।
इकरार का अंदाज़
कभी-कभी इकरार भी सुकूत में होता है,
बिना कहे ही दिल का हर राज़ खुलता है।
प्यार की दास्तान
वो दास्तान-ए-इश्क़, जो कभी कही नहीं गई,
मेरे सुकूत में ही वो ज़िंदा रह गई।
सन्नाटे का शोर
ये सन्नाटा भी एक शोर है, जो कोई सुनता नहीं,
मेरे सुकूत में कई किस्से दफ़न हैं।
उदासी की धुन
उदासी की धुन में जब दिल गुनगुनाता है,
तब मेरा हर लम्हा सुकूत में सिमट जाता है।
आत्मा की आवाज़
आत्मा की आवाज़ सिर्फ़ सुकूत में सुनाई देती है,
शोर में तो बस दुनिया की फ़रियाद होती है।
यादों का कारवां
यादों का कारवां सुकूत में चलता है,
बिना आवाज़ किए, दिल में बसता है।
लम्हों का ठहराव
लम्हों का ठहराव, वक़्त का थम जाना,
यही है वो सुकूत, जिसे दिल ने जाना।
ज़िंदगी का सच
ज़िंदगी का सच अक्सर सुकूत में मिलता है,
ये शोर तो बस एक परदा है जो ढलता है।
हर बात का जवाब
कभी-कभी सुकूत ही हर बात का जवाब होता है,
बिन कहे भी ये सब कुछ कह जाता है।