Khamoshi (ख़ामोशी)
ख़ामोशी (Khamoshi): दिल की अनकही दास्तान
तेरी यादों की गहरी रात में,
लिपटी है मेरी ख़ामोशी हर बात में।
लबों पर है कुछ अनकही दास्तान,
आँखों में तैरती है दिल की ख़ामोशी की पहचान।
जब जुबां से कुछ कह न पाए,
तो मेरी ख़ामोशी ही सब कुछ बता जाए।
शिकायतों का दौर अब खत्म हुआ,
मेरी ख़ामोशी ने सारा शहर जीत लिया।
इश्क के रास्ते में अक्सर,
ख़ामोशी ही सबसे गहरी बात कह जाती है।
रात की तन्हाई में चाँदनी सी,
मेरी ख़ामोशी भी कितनी अफसोसनाक है।
कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो बयान नहीं होते,
बस ख़ामोशी बनके दिल में रह जाते हैं।
वो सुन लेता मेरी धड़कनों को भी,
अगर मेरी ख़ामोशी को समझ पाता।
क्या खूब अदा है ये तेरी भी,
मेरी ख़ामोशी को भी शिकायत समझती है।
हर तरफ एक अजीब सी उदासी है,
शायद मेरी ख़ामोशी की भी अब प्यासी है।
कभी आवाज़ से भी टूट जाते हैं रिश्ते,
कभी ख़ामोशी सारे गिले-शिकवे मिटा देती है।
दिल में है तूफान और लबों पर है ख़ामोशी,
ये कैसा दर्द है जिसकी नहीं कोई कमी।
वो समझता रहा मैं कुछ नहीं कहती,
और मेरी ख़ामोशी बहुत कुछ सहती।
अक्सर गहरे राज़ छुपा लेती है ख़ामोशी,
किसी को न बताए वो दिल की हर मुश्किल।
जब सारे जवाब खत्म हो जाते हैं,
तब ख़ामोशी अपने मायने बताती है।
मेरी ख़ामोशी को मेरी कमज़ोरी न समझना,
ये वो ताक़त है जो सब कुछ छुपा लेती है।
कुछ बातें सिर्फ आँखों से होती हैं,
और कुछ ख़ामोशी में ही सुलझ जाती हैं।
तेरा दिया दर्द भी अब सुहाना लगता है,
तेरी ख़ामोशी में हर पल तेरा नाम लिखता है।
क्या गिला करें अब किसी से,
जब हमारी ख़ामोशी ही हमारी कहानी है।
समंदर की गहराई सी है मेरी ख़ामोशी,
जिसे हर कोई समझ नहीं पाता।
अब तो हर खुशी भी ख़ामोशी में लिपटी है,
जैसे ज़िंदगी ही कोई अधूरी कहानी है।
परिंदों की चहचाहट भी अब चुप है,
मेरी ख़ामोशी ने सब कुछ ढक लिया।
तन्हाई में अक्सर याद आती है तेरी,
और मेरी ख़ामोशी ज़ुबान पर छा जाती है।
ये जो ख़ामोशी है, ये बोलती बहुत है,
बस सुनने वाला कोई होना चाहिए।
हर बात का जवाब देना ज़रूरी नहीं,
कभी-कभी ख़ामोशी भी बहुत कुछ कह जाती है।
दिल के दरवाज़े पर बस दस्तक है,
अंदर सिर्फ मेरी ख़ामोशी की हसरत है।
वो पूछते हैं क्या गम है तुम्हें,
मैं कहता हूँ, मेरी ख़ामोशी ही मेरा मरहम है।
ज़िंदगी के सफ़र में कई मोड़ आए,
पर मेरी ख़ामोशी हमेशा साथ रही।
जब लफ्ज़ों की ज़रूरत न हो,
तब ख़ामोशी ही सबसे सच्चा सहारा बनती है।
मेरी ख़ामोशी में एक गहरा समंदर है,
जिसकी लहरों में सिर्फ तेरी यादें हैं।
कभी ख़ामोशी को पढ़कर देखना,
उसमें भी कई शोर छुपे होते हैं।
दिल की हर आवाज़ दब जाती है,
जब मेरी ख़ामोशी ज़ोर पकड़ती है।
ये ख़ामोशी नहीं, मेरी बेबसी है,
जो हर पल मेरी रूह को सताती है।
अधूरी बातें अक्सर ख़ामोशी बन जाती हैं,
और दिल में हमेशा के लिए रह जाती हैं।
जब सब कुछ कह दिया जाता है, फिर भी,
कुछ अनकही रह जाती है, वो है ख़ामोशी।