Majboori (मजबूरी)
मजबूरी (Majboori) पर दिल छू लेने वाली शायरी
Shayari 1
हम भी चाहें कि उड़ें आसमानों में, मगर पाँव में ज़ंजीर है, नाम जिसकी मजबूरी है।
Shayari 2
इश्क़ में क्या क्या न करना पड़ा हमें, कुछ ख़्वाहिशात थीं, कुछ मजबूरी थी।
Shayari 3
वो रूठ गए हमसे, शायद उनकी भी कोई छुपी हुई मजबूरी रही होगी।
Shayari 4
लफ्ज़ जुबां पे आते नहीं, आंखें सब कह जाती हैं, क्या करें, ये ख़ामोशी भी एक मजबूरी बन जाती है।
Shayari 5
हर रिश्ते की अपनी एक दास्तान होती है, कभी प्यार, कभी दोस्ती, कभी मजबूरी होती है।
Shayari 6
दिल में दर्द, आँखों में नमी, और होठों पे हँसी, ये कैसी मजबूरी है जो जी रहे हैं हम खुशी-खुशी।
Shayari 7
जब तक साँस है, निभाएंगे ये किरदार, चाहे हो मजबूरी या फिर हो प्यार।
Shayari 8
दूर रहकर भी पास हो तुम, ये कैसा सिलसिला है, शायद मेरी मजबूरी का ये नया पहलू मिला है।
Shayari 9
हर एक लम्हा, हर एक पल, तेरे बिन उदास है, पर क्या करें, ये दूरियाँ भी मेरी मजबूरी का लिबास है।
Shayari 10
चाहकर भी तुम्हें अपना न सके, ये कैसी मजबूरी थी हमारी।
Shayari 11
कभी हालात होते हैं जुदा, कभी दिल की मजबूरी होती है।
Shayari 12
ख्वाबों को दफना कर जीना सीख लिया, अब ये मजबूरी है या फितरत, समझ न आया।
Shayari 13
हर दर्द छुपाकर मुस्कुराना पड़ता है, ये भी तो एक मजबूरी ही है ज़माने की।
Shayari 14
जब रिश्ते बोझ बन जाएँ, तब अलविदा कह देना ही बेहतर, यही शायद सबसे बड़ी मजबूरी होती है।
Shayari 15
हर कहानी में एक मोड़ आता है, कभी प्यार, कभी मजबूरी साथ लाता है।
Shayari 16
ये ज़माना, ये दुनिया, सब अपनी सी लगती है, पर अपनी भी कोई मजबूरी होती है।
Shayari 17
वो वादा करते थे साथ निभाने का, क्या हुआ जो बदल गई मजबूरी थी उनकी।
Shayari 18
कभी तो आओ, हमारी भी सुनो, कब तक जिएँगे ये मजबूरी की कहानी।
Shayari 19
दिल की हर बात जुबां तक आ न पाई, ये भी तो एक मजबूरी थी जो हमें सताती रही।
Shayari 20
रिश्तों की डोर बड़ी नाज़ुक होती है, कभी टूट जाती है मजबूरी से।
Shayari 21
हर फैसले के पीछे एक मजबूरी होती है, वरना कोई अपनी खुशी से दूर नहीं होता।
Shayari 22
वो कहते हैं हमें, तुम बदल गए हो, क्या बताएं, ये मजबूरी ने बदल डाला।
Shayari 23
कितनी बातें अनकही रह जाती हैं, इस ज़ालिम मजबूरी की वजह से।
Shayari 24
रिश्तों की कीमत