Bedard (बेदर्द)
बेदर्द (Bedard) शायरी का संग्रह
1. दिल का दर्द
तेरी यादों का बोझ लिए, यह दिल आज भी भटकता है,
तूने जो ज़ख्म दिए, उनका हिसाब कौन रखता है, तू तो बेदर्द (बेदर्द) है।
2. वफा की कीमत
वफा की राह में हम तो लुटे हैं बार-बार,
तुम्हारी बेदर्द (बेदर्द) निगाहों ने, हर ख्वाब तोड़ दिया।
3. यादों का सिला
रात भर जलते रहे, तेरी यादों के दिए,
क्या पता था तुम इतने बेदर्द (बेदर्द) निकलोगे।
4. खामोशी का शोर
मेरी खामोशी को तुमने कभी समझा ही नहीं,
तुम्हारी बेदर्द (बेदर्द) नज़रें, बस तमाशा देखती रहीं।
5. इल्जाम
इल्जाम लगा रहे हो, मेरी मोहब्बत पर आज,
ये बेदर्द (बेदर्द) दुनिया, क्या जाने कैसा है मेरा मिजाज।
6. तन्हाई
तन्हाई के आलम में, अक्सर रोता है ये दिल,
तेरी बेदर्द (बेदर्द) जुदाई ने, जीना मुश्किल कर दिया।
7. किस्मत
मेरी किस्मत में शायद, यही लिखा था,
कि मिल जाए एक बेदर्द (बेदर्द) सा साथी।
8. आंसू
इन आंसुओं का कोई मोल नहीं, तुम्हारी नज़र में,
तुम तो बेदर्द (बेदर्द) हो, तुम्हें क्या खबर मेरे दर्द की।
9. मोहब्बत का अंजाम
मोहब्बत का अंजाम तो देखो, क्या से क्या हो गया,
एक बेदर्द (बेदर्द) सनम के लिए, यह दिल राख हो गया।
10. बेपनाह प्यार
बेपनाह प्यार करके भी, हम तन्हा रह गए,
उस बेदर्द (बेदर्द) के लिए, अपनी जान गंवा बैठे।
11. कसूर
कसूर मेरा था, जो तुमसे दिल लगा बैठे,
तुम तो बेदर्द (बेदर्द) निकले, हमें अकेले छोड़ बैठे।
12. बेवफाई का मंज़र
बेवफाई का ऐसा मंज़र देखा नहीं कभी,
जितना तुमने दिखाया, ऐ बेदर्द (बेदर्द) सनम।
13. दर्द की दास्तान
दर्द की दास्तान लिखूँ तो, स्याही कम पड़ जाएगी,
तुमने जो दिए हैं, वो घाव एक बेदर्द (बेदर्द) कहानी बन जाएगी।
14. इंतज़ार
इंतज़ार की हदें पार कर दीं, तुम्हारे लिए हमने,
मगर तुम न आए, इतने बेदर्द (बेदर्द) हो तुम।
15. गम
मेरा गम तुमसे छुपाया नहीं जाता अब,
क्योंकि तुम हो एक बेदर्द (बेदर्द) इंसान।
16. टूटा दिल
टूटे हुए दिल का दर्द कौन समझेगा,
यहाँ हर कोई बेदर्द (बेदर्द) नज़र आता है।
17. शिकवा नहीं
शिकवा नहीं अब तुमसे, ऐ बेदर्द (बेदर्द) सनम,
हमें मालूम है, मोहब्बत तुम क्या जानो।
18. ज़ख्म
ज़ख्म गहरे थे, पर मुस्कराना पड़ा हमें,
तेरी बेदर्द (बेदर्द) अदाओं ने, यह सज़ा दी हमें।
19. रात भर
रात भर तारे गिनते रहे, तेरी याद में,
क्या तुम्हें खबर है, ऐ बेदर्द (बेदर्द), हमारे हाल की?
20. जिंदगी
ये जिंदगी भी अब एक बोझ सी लगती है,
जब से तू बेदर्द (बेदर्द) होकर मुझसे जुदा हुआ।
21. कद्र
मेरी कद्र नहीं की, तूने कभी भी,
क्योंकि तू तो बेदर्द (बेदर्द) निकला, पत्थर का दिल लेकर।