Jafaa (जफ़ा)
दर्द-ए-दिल और जफ़ा (जफ़ा) के नग़मे
ज़ख्मों की कहानी
वो क्या जाने दर्द-ए-दिल मेरा, जो हर शाम आता है,
हर सुबह एक नया ज़ख्म, ये तेरी जफ़ा (जफ़ा) दे जाता है।
बेवफाई का आलम
मेरी वफाओं का तूने, ये कैसा सिला दिया,
हर पल जफ़ा (जफ़ा) करके, मुझको तन्हा किया।
यादें और तन्हाई
जब भी याद आती है तेरी, दिल में इक टीस उठती है,
तेरी हर जफ़ा (जफ़ा) आज भी, मुझको बेचैन करती है।
प्यार में ज़हर
समझ न पाए थे हम कि, प्यार में ज़हर भी होता है,
तेरी हर जफ़ा (जफ़ा) ने बताया, ये दिल क्यों रोता है।
इश्क़ का अंजाम
इश्क़ का अंजाम कुछ यूं हुआ, कि हम टूट कर बिखर गए,
तेरी एक-एक जफ़ा (जफ़ा) ने, हमें जीना सिखा दिया।
शिकायतें अधूरी
कितनी शिकायतें थीं तुझसे, कितनी बातें कहनी थीं,
पर तेरी जफ़ा (जफ़ा) ने चुप करा दिया, अब कुछ नहीं सहनी थीं।
आंसुओं की दास्ताँ
ये जो बहते हैं मेरी आँखों से, ये सिर्फ़ पानी नहीं हैं,
तेरी बेहिसाब जफ़ा (जफ़ा) की, ये एक अधूरी कहानी हैं।
सब्र का इम्तिहान
कब तक सब्र करे दिल, कब तक ये ज़ख्म सहें,
तेरी हर जफ़ा (जफ़ा) पर भी, हम अब क्या ही कहें।
वफा की कीमत
हमने वफा की थी तुझसे, ये सबसे बड़ी खता थी,
तेरी जफ़ा (जफ़ा) ने हमको, अब सब कुछ सिखा दिया था।
दिल का फरेब
दिल को था फरेब तेरा, ये हम कैसे जान पाते,
तेरी जफ़ा (जफ़ा) के हर मंज़र पर, हम कैसे मुस्कुराते।
खामोश लब
खामोश हैं लब मेरे, पर दिल में शोर मचा है,
तेरी हर जफ़ा (जफ़ा) का हिसाब, आज भी बाकी बचा है।
राहों का सफर
इन राहों पर चलते-चलते, हम भी बदल गए हैं,
तेरी जफ़ा (जफ़ा) के काँटों पर, हम संभल गए हैं।
टूटे ख्वाब
ख्वाब तो कई देखे थे, तेरी आँखों में कभी,
पर तेरी जफ़ा (जफ़ा) ने तोड़ दिए, सारे ख्वाब अभी।
इंतज़ार की हद
इंतज़ार की भी इक हद होती है, ये जानते थे हम,
पर तेरी जफ़ा (जफ़ा) ने वो हद भी तोड़ दी, क्या बताएं अब हम।
अधूरी मोहब्बत
अधूरी रह गई मेरी मोहब्बत, ये कसूर किसका था,
तेरी जफ़ा (जफ़ा) का ही तो, ये सारा सिलसिला था।
रिश्तों की डोर
रिश्तों की ये नाजुक डोर, तूने पल में तोड़ दी,
तेरी जफ़ा (जफ़ा) ने मेरे दिल में, एक गहरी चोट छोड़ दी।
जुदाई का गम
जुदाई का गम भी क्या कम था, जो तूने और बढ़ाया,
तेरी जफ़ा (जफ़ा) ने हर खुशी को, हमसे दूर भगाया।
दिल की पुकार
दिल की पुकार भी अब, तेरी दहलीज तक नहीं जाती,
तेरी जफ़ा (जफ़ा) के इस आलम में, कोई उम्मीद नहीं आती।
अफ़सोस की शाम
हर शाम अफ़सोस में गुजरती है, ये कैसा नसीब है,
तेरी हर जफ़ा (जफ़ा) ने मुझे, मौत के करीब ला दिया है।
कसूर अपना
माना कसूर मेरा ही था, जो तुझसे दिल लगा बैठे,
तेरी जफ़ा (जफ़ा) की आग में, हम अपना सब कुछ गँवा बैठे।
अधूरी ख्वाहिश
कोई अधूरी ख्वाहिश नहीं थी, बस तेरा प्यार चाहिए था,
तेरी जफ़ा (जफ़ा) ने तो हमसे, जीने का सहारा भी छीन लिया था।
तड़प का मंजर
ये रातें तड़प में कटती हैं, ये दिन भी सूने से हैं,
तेरी जफ़ा (जफ़ा) ने हर खुशी को, इस दिल से रूठे से हैं।
दिल की आग
क्या बुझाओगे तुम दिल की आग को, जो तुमने लगाई है,
तेरी जफ़ा (जफ़ा) की हर चिंगारी, आज भी सुलग रही है।
बेगानगी का सफर
अब तो ये बेगानगी का सफर, अकेला ही तय करना है,
तेरी जफ़ा (जफ़ा) के हर मोड़ पर, बस मुझे ही मरना है।