Berukhi (बेरुख़ी)
बेरुख़ी (Berukhi): दर्द और अल्फाज़ का संगम
तेरी खामोशी में भी वो बात थी,
जो छुपाए थी तेरी बेरुख़ी की रात थी।
हर लफ्ज़ में तेरी बेरुख़ी का असर था,
मेरे दिल में बस यही एक डर था।
इश्क़ में मिली बस यही बेरुख़ी,
ज़िंदगी भर का अब यही है दुख़ी।
क्या बताऊँ तेरी बेरुख़ी का आलम,
हम तो तेरे बिना बेहाल हैं सनम।
उसकी एक निगाह में थी लाखों बेरुख़ी,
और हम थे कि बस प्यार ही देखते रहे।
हर रात जाग कर तेरी यादों में गुम,
तेरी बेरुख़ी ने कर दिया है ये सितम।
तेरी बेरुख़ी का अंदाज़ बदल गया है,
शायद मेरे प्यार का अंदाज़ भी ढल गया है।
दिल में उम्मीदें थीं, आँखों में प्यार था,
पर तूने बस बेरुख़ी का ही वार किया था।
किस-किस से कहें अपनी दास्तान-ए-गम,
तेरी बेरुख़ी ने तोड़ा हर एक भरम।
शिकायत नहीं कि तेरी बेरुख़ी का ज़माना है,
बस अफ़सोस है कि दिल को भी आज़माना है।
माना कि तूने बेरुख़ी अपना ली है,
पर हमने तो आज भी तुझे अपना माना है।
तेरी बेरुख़ी ने हमें जीना सिखा दिया,
अकेले ही हर गम को पीना सिखा दिया।
वो जो कहते थे कभी साथ न छोड़ेंगे,
उनकी बेरुख़ी ने हमें तन्हा छोड़ दिया।
तेरी बेरुख़ी ने तो कमाल कर दिया,
मोहब्बत को मेरी मालामाल कर दिया।
कब तक सहें तेरी बेरुख़ी का सितम,
अब तो दिल भी कह उठा है, बस कर हमदम।
तेरी बेरुख़ी ही अब मेरी पहचान है,
वरना कौन पूछता इस गुमनाम इंसान को।
ज़िंदगी ने दिए बहुत से इम्तिहान हैं,
तेरी बेरुख़ी भी उन्हीं में से एक शान है।
इंतज़ार करते रहे तेरी एक झलक का,
और तेरी बेरुख़ी ने हमें दूर कर दिया।
ग़म ने कर दिया मेरा हाल बेहाल सा,
जब से देखी तेरी बेरुख़ी का कमाल सा।
दिल की गहराइयों में छुपा है दर्द,
तेरी बेरुख़ी का है ये बेपनाह मर्ज़।
कभी सोचा न था कि ऐसा भी होगा,
तेरी बेरुख़ी का ये आलम इतना गहरा होगा।
हर रात आँखों में लिए ख्वाबों का मेला,
तेरी बेरुख़ी ने कर दिया मुझको अकेला।
अब तो आदत सी हो गई है तेरी बेरुख़ी की,
लगता है अब ज़िंदगी ऐसे ही चलेगी।
तेरी बेरुख़ी में भी एक अजीब सा सुकून है,
जो हर खुशी को भी अब बेमायने कर दे।
लम्हे ठहर से गए, जब से तेरी बेरुख़ी देखी,
अब हर खुशी भी लगे बेजान और फीकी।
वो जो कहती थी कि जान है तू मेरी,
उसकी बेरुख़ी ने ली जान मेरी।
अल्फाज़ भी खामोश हैं, दिल भी उदास है,
तेरी बेरुख़ी का ये कैसा अहसास है।
किस-किस को बताएं दिल का ये हाल,
तेरी बेरुख़ी ने किया है बेमिसाल।
तेरी बेरुख़ी का ज़हर धीरे-धीरे उतर रहा है,
ये दिल भी अब तेरी यादों से मुकर रहा है।
हर रास्ते पर सिर्फ तेरा ही नाम था,
तेरी बेरुख़ी ने कर दिया बदनाम था।
अब तो बस तन्हाई ही मेरा सहारा है,
तेरी बेरुख़ी ने मुझको बहुत मारा है।
सोचा न था कि प्यार में भी ये दिन आएगा,
तेरी बेरुख़ी का गम मेरा दिल खाएगा।
तेरी बेरुख़ी ने हर ख्वाब तोड़ दिए,
हमने भी अब तेरे रास्ते छोड़ दिए।
गम-ए-जुदाई में जलते रहे रात-दिन,
तेरी बेरुख़ी का असर कभी कम न हुआ।
हमने तो हर अदा पे लुटा दी जान,
तेरी बेरुख़ी ने तोड़ा हर अरमान।
इश्क़ की राहों में मिली बस ठोकरें,
तेरी बेरुख़ी ने
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