Hijab (हिजाब)
हिजाब पर शायरी (Shayari on Hijab)
पर्दे में भी है एक अलग नूर, एक अलग एहसास...
चेहरे पर जब होता है हिजाब, एक अलग ही शान होती है,
हर नज़र से बचकर, इसमें एक पहचान होती है।
वो पर्दा है जो लाज का, वो हिजाब कहलाता है,
हर एक निगाह को अपनी हद में रखना सिखाता है।
खुदा की रहमत है ये, जो तुम पहनती हो हिजाब,
तुम्हारी सादगी में ही छुपा है एक नया ख्वाब।
नाज़ुकी का पर्दा है, आँखों में हया का नूर,
हर अदा में झलकता है, जब हो सर पर हिजाब दूर।
जब लहराता है हवा में तेरा खूबसूरत हिजाब,
लगता है जैसे चाँद ने ओढ़ा हो कोई नया शबाब।
तेरा हिजाब सिर्फ एक कपड़ा नहीं, ये तेरी इज्जत का ताज है,
जो छुपाता है तुझको हर बुरी नज़र से, ये खुदा का अंदाज़ है।
सांसें भी महक उठती हैं, जब तू लेती है पर्दा,
खुशबू बन जाती है तेरी, जब ढकती है हिजाब खुदा।
इस हिजाब में छुपी है तेरी बेपनाह खूबसूरती,
हर नज़र को तरसाकर, बढ़ा देती है हस्ती।
वो सादगी, वो पाक दामनी, हिजाब की कहानी है,
हर अजनबी निगाह से दूर, एक नई जिंदगानी है।
तेरे हिजाब में है एक सुकून, एक अदब का पैगाम,
ये सिर्फ लिबास नहीं, ये है ईमान का सम्मान।
कौन कहता है हिजाब बेड़ी है, ये तो आजादी का निशान है,
खुद को बुरी नज़र से बचाना, ये तो खुदा का फरमान है।
तेरे हिजाब में दिखती है एक अलग सी चमक,
जैसे अँधेरी रात में कोई जुगनू जाए दमक।
वो हिजाब ही तो है जो तेरी पहचान को गहरा करता है,
हर कदम पर तेरी इज़्ज़त को वो और भी सुनहरा करता है।
तेरी आँखों की शरम, तेरे हिजाब की ज़ीनत,
बयाँ करती है हर वो बात, जो है तेरी शख्सियत।
जैसे तारे चमकते हैं बादलों के पीछे से,
वैसे ही चमकती है तू, हिजाब के अपने अंदाज से।
हिजाब है तेरी पहचान, तेरी खुद्दारी का निशाँ,
हर रास्ते पर देता है ये तुझको मान।
तेरी रूह की पाकीज़गी को, ये हिजाब दर्शाता है,
हर नज़र से बचाकर, तुझको और निखारता है।
इबादत का एक हिस्सा है, ये हिजाब तेरा,
जिसमें दिखता है रब से तेरा गहरा नाता।
पर्दे में भी है एक अलग नूर, एक अलग एहसास,
हिजाब में सिमटी है तेरी हर एक खास बात।
खुदा ने बख्शा है ये हिजाब, तेरी हिफाज़त के लिए,
ताकि कोई नज़र न उठे, तेरी इज्जत के लिए।
ये हिजाब है तेरी पहचान, तेरी सादगी का प्रतीक,
जिसे पहन कर तू लगती है, हर नज़र से अज़ीज़।
जब संवर कर चलती है, तू अपने हिजाब में,
बहारें भी खिल उठती हैं, तेरे ही अंदाज़ में।
तेरे हिजाब की अहमियत, हर कोई नहीं जानता,
ये तो सिर्फ वो ही समझता है, जो तुझको पहचानता।
ये हिजाब है एक कवच, जो तुझको बचाता है,
समाज की हर बुराई से, ये तुझको छुपाता है।
सादगी में भी है एक अलग नूर, हिजाब है तेरी शोभा,
जिसमें तू लगती है, सबसे हसीन और मनमोहक।
जब से तुमने पहना है, ये खूबसूरत हिजाब,
हर नज़र में तुम हो, एक नया आफताब।
तेरा हिजाब तेरी शान है, तेरी पहचान है,
हर ज़माने में ये, तेरी इज़्ज़त का मान है।
हया का पैगाम है, तेरे हिजाब में छुपा,
हर कदम पर तेरा, ये साथ निभाता।
जिस नज़र में हया हो, वही समझती है हिजाब,
ये सिर्फ एक पर्दा नहीं, ये है एक नया बाब।
खुदा की तरफ से है, ये एक हसीन तोहफा,
हिजाब में छुपी है तेरी, सबसे पाक रूह।
तेरी ज़ीनत है, तेरा हिजाब, ये तेरी पहचान है,
हर बुराई से बचाए, ये तेरा मान है।
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