Sharam (शर्म)

hindi shayari, हिंदी शायरी

शर्म की चादर

एहसासों का एक गहरा पहलू

शर्म का पहला एहसास

उनकी निगाहों में देखी, एक अजीब सी **शर्म**,
दिल में उठी लहर, बेखुदी की नरम.

निगाहों की छुपी बात

झुकी पलकों में छिपी है, उनकी **शर्म** की दास्तान,
हर अदा में उनकी है, एक अलग ही पहचान.

दिल की गहराइयों से

कभी लबों पर हँसी, कभी आँखों में **शर्म**,
ये दिल का रिश्ता है, गहरा और गरम.

इश्क की निशानी

इश्क में डूबे हैं, अब कोई गिला नहीं,
उनकी हर **शर्म** में, हमें कुछ मिला सही.

खूबसूरती का लिबास

चेहरे पर उनके, **शर्म** का अनोखा नूर है,
जैसे चांद को भी, खुद पर थोड़ा गुरूर है.

अल्फाजों में बयाँ

कह ना पाए जो लफ्ज़, वो आँखों में थी **शर्म**,
इशारों में सब कह गए, ये था उनका धर्म.

पहलू-ए-हयात

जीवन के हर मोड़ पर, कुछ बातें हैं **शर्म** की,
ये दिखाती हैं मर्यादा, ये हैं इंसानियत की.

रूठना और मनाना

रूठ जाते हैं वो कभी, **शर्म** से आँखें झुका के,
हम मनाते हैं उन्हें, दिल की धड़कन बढ़ा के.

सादगी का गहना

सादगी उनकी है, और **शर्म** उनका गहना,
इस अदा पे तो हम, सदियों तक मरना.

मुहब्बत की जुबां

मुहब्बत की जुबां में, **शर्म** भी है एक बात,
जो कह जाती है वो सब, जो छुपे हैं जज़्बात.

दिलकश अदा

उनकी हर अदा में है, एक दिलकश **शर्म** का रंग,
जो हमें कर देता है, उनके इश्क में मलंग.

मासूमियत का आईना

मासूमियत उनकी, **शर्म** का आईना है,
देखकर जिसे, दिल मेरा भी बेचैन सा है.

रिश्तों की डोर

रिश्तों की डोर में, **शर्म** की गाँठ है,
जो जोड़े रखती है, हर एक साथ है.

तस्वीर में ढली

हर तस्वीर में उनकी, एक अलग **शर्म** है,
जैसे हर नज़र में, कोई छुपा सा मर्म है.

वो **शर्म** की लाली

वो गालों पे आई, **शर्म** की हल्की सी लाली,
कर देती है दिल को, और भी मतवाली.

जज़्बातों का समंदर

जज़्बातों का समंदर, उनकी **शर्म** में है गहरा,
जो डुबो लेता है हमें, बिना किसी पहरा.

चुपके से कहना

चुपके से कहती है **शर्म**, वो सारी बातें,
जो नहीं कह पाते, जुबां से हम राते.

नज़र की अदा

नज़रें मिलती नहीं, **शर्म** है उनकी अदा,
बस इसी बात पे तो, हम हैं उन पे फिदा.

पवित्र बंधन

पवित्रता का एक बंधन है, ये **शर्म** का एहसास,
जो हमें सिखाता है, हर रिश्ते का इतिहास.

खामोश पैगाम

खामोश रहकर भी, **शर्म** कुछ कह जाती है,
दिल के हर कोने में, अपनी जगह बना जाती है.

खुद्दारी का निशान

खुद्दारी का निशान है, कुछ **शर्म** भी दिल में,
जो रोकती है हमें, हर बुरी मंजिल में.

पहली मुलाकात

पहली मुलाकात में, वो **शर्म** की पुतली,
आज भी याद है हमें, हर बात उनकी निकली.

ग़लतियों का एहसास

ग़लतियों के एहसास में, एक हल्की सी **शर्म**,
जो सिखाती है हमें, जीवन का सही मर्म.

सच्चाई का पर्दा

कभी **शर्म** सच्चाई का, एक पर्दा बन जाती है,
जो अनकहे अल्फाजों को, आँखों से कह जाती है.

सारे जहाँ से निराली

उनकी हर अदा, सारे जहाँ से है निराली,
वो जब भी करती हैं **शर्म**, लगती हैं दिलवाली.

प्यार का इज़हार

प्यार का इज़हार भी, **शर्म** में होता है ख़ास,
जब दिल कहता है सब कुछ, चुपके से पास-पास.

अल्फाजों का खेल

ये **शर्म** भी है क्या, अल्फाजों का एक खेल,
कभी रुला देती है, कभी करा देती है मेल.

दिल की बातें

कुछ बातें दिल की, **शर्म** से रह जाती हैं,
अनकही होकर भी, बहुत कुछ कह जाती हैं.