Nigaah (निगाह)

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Nigaah (निगाह): An Ode to Gaze

Capturing Emotions Through the Lens of Nigaah

उसकी पहली निगाह ने ही दिल चुरा लिया।

तेरी निगाहों से ही शुरू हुई कहानी मेरी।

क्या खूब अदा थी, तेरी निगाह का जादू।

एक पल की निगाह ने उम्र भर का दर्द दे दिया।

जब से मिली निगाह तुझसे, चैन-ओ-करार गया।

ये निगाहें बोलती हैं, वो लब क्या बोल पाएंगे।

तेरी निगाहों में देखा है, मैंने सारा जहां।

बड़ी गहरी हैं तेरी निगाहें, डूब जाने को जी चाहे।

बस एक निगाह काफी है, हाल-ए-दिल बताने को।

निगाहों से घायल करके, तुम कहां चले गए।

उसकी निगाह में वो कशिश थी, जो कहीं और न थी।

तेरी निगाह का ये तीर, सीधा दिल में उतरा।

हर निगाह में छुपा है एक राज गहरा।

निगाहें मिलीं तो क्या हुआ, प्यार तो दिल से होता है।

निगाहें झुका के तूने, कमाल कर दिया।

कौन समझेगा निगाहों की जुबां, जब लब खामोश हों।

तेरी निगाह का असर, मेरे हर ख्वाब पर है।

वो निगाह जो हमें देखे, वो निगाह चाहिए।

क्या गजब की निगाह थी, जो हमें दीवाना कर गई।

मेरी हर निगाह तेरी निगाह का इंतजार करती है।

निगाहों से कह दो, थोड़ा संभल के देखें।

उसकी निगाह में एक सुकून था, एक अपनापन।

पहली निगाह में ही सब कुछ हार बैठे।

ये निगाहें ही तो हैं, जो दिल का आईना हैं।

जब-जब उठी तेरी निगाह, दिल बेकरार हुआ।

निगाहों की बातें निगाहें ही जानें।

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