Agosh (आग़ोश)

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आग़ोश: दिल को छू लेने वाली शायरी

प्रेम, सुकून और आश्रय के अहसास में लिपटी कविताएँ

तुम्हारी यादों की ठंडी हवा चली,
और हम उनकी आग़ोश में सो गए।
दुनिया की फ़िक्र से बेख़बर होकर,
एक पल में सदियों के लिए खो गए।

तेरी आग़ोश में आकर लगा यूँ,
जैसे मिल गया हो खोया हुआ जहाँ।
हर दर्द हर ग़म भुलाकर मैंने,
पा लिया है मेरा सच्चा आसमां।

जब रात ढले और चाँद चमकता है,
तेरी आग़ोश में मेरा दिल धड़कता है।
हर साँस में बस तू ही समाया है,
यह कैसा अनोखा बंधन बन गया है।

माँ की आग़ोश सा सुकून कहीं नहीं,
उसमें लिपटकर हर ग़म भूल जाते हैं।
उस ममता की छाँव में जीते हैं हम,
और सारी दुनिया से दूर हो जाते हैं।

बदलियों की आग़ोश में छुपा सूरज,
जैसे देता है धरती को नया प्रकाश।
यूँ ही तुम भी मेरी जिंदगी में आए,
भर दिया है मेरे जीवन में उल्लास।

कभी कभी दिल ये सोचता है मेरा,
काश मैं भी होता तुम्हारी आग़ोश में।
जहाँ न कोई फिक्र होती, न कोई डर,
बस खोया रहता मैं तेरी जादू की दुनिया में।

समंदर की गहरी आग़ोश में,
कई राज़ छुपे होते हैं मौन होकर।
मेरी रूह भी तेरी यादों में खोई है,
जैसे लहरें मिलती हैं किनारों से मिलकर।

पतझड़ में भी बहार सी लगती है,
जब तेरी आग़ोश का एहसास होता है।
हर सूखा पत्ता भी मुस्कुराता है,
दिल में फिर से कोई फूल खिलता है।

ख्वाबों की आग़ोश में रहता हूँ अक्सर,
जहाँ सिर्फ़ तुम और मैं होते हैं।
कोई तीसरा नहीं आता बीच में हमारे,
और हम सिर्फ़ एक-दूसरे में खोते हैं।

ये रात कितनी हसीन है देखो ज़रा,
सितारों की आग़ोश में सिमटी हुई।
जैसे मेरा दिल तुम्हारी धड़कन में,
हर पल हर लम्हा लिपटी हुई।

जब भी अकेला महसूस करता हूँ,
तेरी यादों की आग़ोश में चला आता हूँ।
वहाँ सुकून मिलता है, चैन मिलता है,
और अपने सारे ग़म भुला जाता हूँ।

उस महबूब की आग़ोश मिल जाए अगर,
तो जन्नत भी फीकी लगे मुझे।
सारी दुनिया भूल जाऊँ एक पल में,
बस उसी की पनाह में रहूँ मैं।

बचपन की आग़ोश में कितना सुख था,
न कोई चिंता, न कोई डर था।
आज भी उन लम्हों को याद करता हूँ,
जब माँ की गोद मेरा घर था।

सुकून मिलता है जहाँ तेरी आग़ोश में,
वो जगह ही मेरी दुनिया है, मेरा घर है।
हर दर्द भूल जाता हूँ मैं पल भर में,
जब तेरा प्यार मेरे साथ सफ़र है।

तेरी बातों की आग़ोश में सिमटकर,
दिल के हर ज़ख्म भर जाते हैं।
तेरी हँसी सुनके मेरी रूह खिल उठती है,
और सारे गम कहीं गुम हो जाते हैं।

फूलों की आग़ोश में शबनम जैसे,
निखार लाती है उसकी खूबसूरती में।
वैसे ही तेरा प्यार मेरी ज़िंदगी में,
रंग भरता है हर छोटी खुशी में।

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