Dil (दिल)
दिल (Dil): जज़्बातों का समंदर, शायरी की दुनिया
Shayari 1
हर आहट पर तेरा नाम, मेरा दिल पुकारता है,
तेरी यादों के सहारे ही, ये ज़माना गुज़ारता है।
Shayari 2
बड़ा बेताब रहता है, ये मेरा नादान दिल,
हर पल ढूँढता है तुझको, ऐ मेरे हमराज़-ए-मंज़िल।
Shayari 3
तेरी चाहत में खोया, मेरा ये आवारा दिल,
ना जाने किस मोड़ पे, ढूँढेगा अपनी मंज़िल।
Shayari 4
जब से तुम मिले हो, मेरा दिल बहकने लगा है,
हर धड़कन तेरी याद में, अब तो धड़कने लगा है।
Shayari 5
कुछ अजीब सा है रिश्ता, तेरा और मेरे दिल का,
कभी पास लगता है तू, कभी दूर किनारा मुश्किल का।
Shayari 6
हर ज़ख्म को चुपचाप सहता है मेरा दिल,
पर तेरी एक मुस्कान पे, फिर भी मरता है ये दिल।
Shayari 7
ये कैसा इश्क़ है तेरा, जो दिल को बेकरार करे,
सारी रात जगाए मुझे, और सुबह का इंतज़ार करे।
Shayari 8
तेरे बिना अब तो, ये दिल कहीं लगता नहीं,
हर लम्हा तेरी याद में, ये मेरा दिल जलता ही।
Shayari 9
कभी सोचा न था कि, यूं तड़पेगा मेरा दिल,
तेरी जुदाई का ग़म अब, बन गया है मेरी मंज़िल।
Shayari 10
बड़ी मुश्किल से सम्भाला था, अपने टूटे हुए दिल को,
फिर से तोड़ दिया तुमने, क्या मिला तुमको इस खेल को।
Shayari 11
ख़ामोशी में भी वो बात कह जाता है, मेरा दिल,
जो लफ्ज़ों में बयां करना, हर बार मुश्किल है।
Shayari 12
क्यों हर पल तेरी याद में, डूब जाता है मेरा दिल,
जैसे कोई कश्ती हो, और तू ही उसकी मंज़िल।
Shayari 13
कुछ इस तरह से टूटा है, मेरा ये मासूम दिल,
अब तो हर आवाज़ भी, लगती है किसी तीर की किल।
Shayari 14
हर ख़ुशी से बढ़कर, तेरी एक झलक की आस है,
तेरे इंतज़ार में ही, धड़कता मेरा ये दिल ख़ास है।
Shayari 15
मेरी रूह में बस गया है, तेरा ही नाम, ऐ सनम,
तेरी याद में ही कटती है, मेरे दिल की हर शब-ओ-ग़म।
Shayari 16
अक्सर सोचता हूँ कि, क्यों इतना बेचैन है मेरा दिल,
क्या तुम भी मुझे याद करते हो, क्या यही है मेरी मंज़िल।
Shayari 17
ना जाने कितने राज़, छुपाए बैठा है मेरा दिल,
बस एक तेरा नाम ही है, जो इसे मिलता है हासिल।
Shayari 18
तेरी आँखों में देखा तो, खो गया मेरा ये दिल,
फिर कोई और मंज़र, इसे भाया ही नहीं, ऐ मंज़िल।