Khwaab (ख़्वाब)
ख़्वाबों की दुनिया: एक शायरी संग्रह
रात की गहराई में, एक नया ख़्वाब जगा,
सुबह की किरणों सा, उम्मीदों का रंग भरा।
पलकों तले छुपा है, एक अनमोल ख़्वाब मेरा,
जीने की हर वजह है, यही तो संसार मेरा।
टूटे हुए तारों सा, बिखर गया वो ख़्वाब,
फिर भी दिल में है आस, लौट आएगा वो आफताब।
हर रात आँखों में, सजता है तेरा ख़्वाब,
कैसे कहूँ तुझसे, क्या है मेरा जवाब।
कभी सच न हो पाया, वो प्यारा सा ख़्वाब,
फिर भी आँखों में बसा है, वो अधूरा नक़ाब।
तेरी यादों के भंवर में, डूबा मेरा ख़्वाब,
हर पल तेरी चाहत, यही मेरा अज़ाब।
आँखों में कैद है, एक अजीब सा ख़्वाब,
उसे पूरा करने की, अब कहाँ रही ताब।
हकीकत बन जाए, काश मेरा ये ख़्वाब,
खुशियों से भर जाए, हर लम्हा और हर बाब।
ज़िंदगी की राहों में, खो गया वो ख़्वाब कहीं,
ढूंढता फिरता हूँ मैं, अब मिले वो मुझे नहीं।
हर आहट पे लगता, पूरा होगा ख़्वाब,
पर हर बार निराशा, बन जाता है अज़ाब।
बंजर ज़मीन पर, फूलों सा उगा ख़्वाब,
उम्मीद की बारिश में, खिल उठा हर जवाब।
सपनों की दुनिया में, रहता है मेरा ख़्वाब,
हकीकत से दूर, वो है एक अनमोल आब।
तारों की चादर ओढ़े, सो रहा है ख़्वाब,
कल सुबह फिर जागेगा, बनके सुनहरा जवाब।
अधूरा है अभी वो, प्यारा सा मेरा ख़्वाब,
रंग भरेगा उसमें, मेरा हर एक जवाब।
दूर कहीं उड़ता, पंछी सा मेरा ख़्वाब,
आसमां छूने को बेताब, बिना कोई हिसाब।
तेरी ही यादों से, बुनता है मेरा ख़्वाब,
हर एक धागे में, तेरी मोहब्बत का शबाब।
धुंधली सी तस्वीर में, छिपा मेरा ख़्वाब,
धीरे-धीरे उभर रहा है, बनके कोई नवाब।
सोचता हूँ कभी मैं, ये कैसा है ख़्वाब,
हकीकत से बढ़कर, लगता है ये जनाब।
दिल के आंगन में, महकता मेरा ख़्वाब,
इंतज़ार में हूँ कब, आयेगा उसका जवाब।
कागज़ पर उतारे हैं, हर रात के ख़्वाब,
शायद किसी दिन बन जाएं, वो मेरी किताब।
ख़ामोशी में भी गूँजे, वो हसीन ख़्वाब,
आँखों में चमक है, हो जाए वो कामयाब।
ख्वाहिशों के दामन में, पल रहा है ख़्वाब,
एक दिन तो पूरा होगा, ये मेरा हिसाब।
रात भर जागता हूँ, बस तेरा ख़्वाब देख,
सुबह होने से पहले, कहीं जाए ना वो बहक।
अंधेरी राहों में, रौशनी सा मेरा ख़्वाब,
भटक न जाऊँ कहीं, है यही मेरा जवाब।
पंख लगाकर उड़ना चाहे, मेरा हर ख़्वाब,
आसमां की बुलंदियों को, छूने का है खिताब।
जब भी देखता हूँ तुझे, दिल में आता ख़्वाब,
सारी दुनिया छोड़ दूं, बन जाऊँ तेरा आफताब।
रेत की मानिंद, फिसलता गया ख़्वाब,
हाथों से छूटा ऐसे, जैसे हो कोई सराब।
रंगों से भरा है, दिल का हर ख़्वाब,
हर रंग में झलकती, तेरी सूरत का शबाब।
कभी न भूला पाऊँगा, वो मीठा सा ख़्वाब,
जिसमें तू मेरी थी, और मैं तेरा जवाब।
मुश्किलों से लड़कर, पूरा करूँ वो ख़्वाब,
ज़िंदगी की हर जंग में, रहूँ मैं कामयाब।
बंद आँखों में भी, तेरा दीदार है ख़्वाब,
खुली आँखों से देखूँ तो, तू ही है मेरा आब।
हर सुबह एक नया ख़्वाब, हर शाम एक नई बात,
यही तो है ज़िन्दगी, करती है हर पल सौगात।
इंतज़ार में बैठा हूँ, कब पूरा होगा ख़्वाब,
दिल में उम्मीद लिए, देता हूँ हर जवाब।
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