Dhokha (धोखा)
धोखा (Dhokha): दर्द-ए-दिल की शायरी
धोखे की दास्तान
हर मोड़ पर अपनों से मिला है ऐसा ज़हर,
कि अब तो लगने लगा है हर रिश्ता धोखा है।
तेरी आँखों में देखी थी मैंने वफ़ा की चमक,
पता न था वो भी एक गहरा धोखा था।
मोहब्बत के नाम पर तूने जो दिए ज़ख्म,
उन्हें भर नहीं पाया यह दिल का धोखा है।
जिस पर किया था भरोसा हद से ज़्यादा,
उसी की चाल थी, उसी का धोखा था।
खुली आँखों से देखे थे जो हसीन सपने,
वो सब भी निकले महज एक धोखा।
ज़िंदगी ने सिखा दिया है यह नया सबक,
खुशी के लिबास में भी छुपा होता है धोखा।
वो वादा, वो कसमें, सब झूठी निकली,
तेरी हर बात में था बस एक बड़ा धोखा।
दिल में लेकर दर्द, फिर भी मुस्कुराते हैं हम,
क्योंकि हँसना भी आजकल एक धोखा है।
ज़मानत नहीं है अब किसी रिश्ते की,
हर चेहरा छिपाए बैठा है एक धोखा।
कांच सा दिल था मेरा, तूने पत्थर से तोड़ा,
यह कैसा प्यार था, यह कैसा धोखा था?
अकेला रहना सीख लिया है अब तो,
महफ़िलों में भी मिलता है अक्सर धोखा।
गैरों से क्या शिकायत, जब अपनों ने ही,
हर कदम पर दिया है दिल को धोखा।
तेरी बातों में मिठास थी, इरादों में ज़हर,
तेरी दोस्ती भी थी एक बड़ा धोखा।
हम तो सोचते थे प्यार में सब कुछ है सच,
कमबख्त निकला मेरा यह ख़्याल भी धोखा।
आँसू भी सूख गए आँखों से अब तो,
हर एहसास में घुल गया है धोखा।
प्यार के नाम पर अक्सर बिक जाते हैं दिल,
और फिर देते हैं लोग उन्हें धोखा।
नकाबपोश थे वो, जिन्हें हम दोस्त कहते थे,
उनकी हर अदा में छिपा था गहरा धोखा।
सच्चाई की राह पर चलना मुश्किल है बहुत,
क्योंकि हर मोड़ पर मिलता है धोखा।
टूटे हुए दिल को अब सहारा नहीं चाहिए,
क्यूंकि हर सहारे में देखा है धोखा।
रूह तक ज़ख्मी कर गया तेरा बेवफ़ाई का तीर,
प्यार नहीं था वो, था एक मीठा धोखा।
अब तो अजनबी ही अच्छे लगते हैं,
अपनों ने दिया है बस धोखा ही धोखा।
किस पर यकीन करें, किस पर एतबार,
यहाँ तो साया भी देता है कभी-कभी धोखा।
हंसी के पीछे छुपे थे दर्द के अनमोल आँसू,
यह मेरी आँखों का ही तो था एक धोखा।
चाँद तारों की बातें भी झूठी निकलीं,
रात की चांदनी भी निकली एक धोखा।
ज़िन्दगी ने मुझे एक बात सिखाई है,
कभी-कभी अपनी साँसें भी देती हैं धोखा।
वो कहता था साथ देगा हर मोड़ पर,
पर उसने ही दिया सबसे बड़ा धोखा।
दिल के हर कोने में बस दर्द है अब,
तेरी मोहब्बत ने दिया है ऐसा धोखा।
न कोई हमदर्द है, न कोई हमराज़ अब,
हर शख़्स ने दिया है मुझे धोखा।
भरोसे की दुनिया थी, पल भर में ढह गई,
जब तेरी आँखों में देखा धोखा।
ये दुनिया भी कितनी अजीब है यारों,
जो सच्चा प्यार करे, उसी को मिलता है धोखा।
खुशियों का हर लम्हा अब चुभता है मुझे,
क्यूंकि हर खुशी के पीछे देखा है धोखा।
वो बातें, वो मुलाकातें, सब झूठ थीं,
इश्क के नाम पर दिया गया था धोखा।
अब तो आइना भी अजनबी लगता है,
उसमें दिखती है बस एक धोखा खाई हुई सूरत।
हर शम्मा के नीचे अंधेरा पाया है मैंने,
उजाले के पीछे भी होता है धोखा।
दिल के दरवाज़े बंद कर दिए हैं अब,
डर लगता है कहीं फिर न मिल जाए धोखा।
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