Haqeeqat (हक़ीक़त)
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हक़ीक़त की दुनिया: 30 दिलकश शायरियां
1. बेनकाब ज़िन्दगी
ज़िंदगी की हर एक मोड़ पर, अक्सर मिली है ठोकर,
सामने आती है जब हक़ीक़त, दिल मेरा रोता है छुपकर।
2. सपनों का सच
सपनों की दुनिया में खोया रहता हूँ अक्सर,
पर जब आँखें खुलती हैं, तो सामने होती है हक़ीक़त।
3. कड़वी सच्चाई
कितनी कड़वी होती है अक्सर ये दुनिया की चाल,
मीठी बातों के पीछे छिपी होती है हक़ीक़त की ढाल।
4. चेहरा और नकाब
हर चेहरे पर एक नकाब है, पहचानना मुश्किल,
कभी-कभी तो अपनी ही हक़ीक़त से अनजान रहता है दिल।
5. रोशनी का एहसास
अँधेरों में खो गए थे हम, कब से कहीं,
रोशनी बन के आई है, ज़िन्दगी की हक़ीक़त जब से सुनी।
6. धोखे का आइना
दिखावा बहुत था, हर तरफ धोखे का आइना,
पर एक दिन सामने आ ही गई, मेरी हक़ीक़त।
7. दर्द की जुबाँ
खामोशियाँ भी अपनी एक जुबाँ रखती हैं,
अक्सर दर्द भरी हक़ीक़त उनमें ही होती है।
8. रिश्तों की सच्चाई
रिश्तों की डोर बड़ी नाज़ुक होती है, कब टूट जाए,
आजकल रिश्तों की हक़ीक़त में बस स्वार्थ ही नज़र आए।
9. दिल का फरेब
कितना नासमझ है ये दिल, हर बात मान लेता है,
फरेब को भी हक़ीक़त, पल भर में जान लेता है।
10. वक़्त की मार
वक़्त की मार ने हर शख्स को बदला है यहाँ,
सामने खड़ी है अपनी हक़ीक़त, और हम हैं कहाँ।
11. ख्वाबों का टूटना
ख़्वाबों के महल सजाए थे हमने कितने,
जब वो टूटे तो पता चला, कैसी होती है हक़ीक़त।
12. दिल की बात
जो दिल में छुपा था, अब कहने लगा हूँ,
यही है मेरी हक़ीक़त, जिसे जीने लगा हूँ।
13. खुद से मुलाक़ात
अक्सर भीड़ में खो जाता हूँ खुद ही से मैं,
आईना दिखाता है मुझे, मेरी हक़ीक़त जब।
14. उम्मीदों का बोझ
उम्मीदों का बोझ लिए कब तक चलोगे यूँ,
कभी-कभी आसान होता है, स्वीकारना हक़ीक़त को।