Ranj (रंज)
रंज-ओ-ग़म: दिल की गहराइयों से निकली शायरियां शायरी 1 ज़िंदगी एक लंबा सफ़र है, और हम चले जा रहे हैं, हर मोड़ पर एक नया रंज , दिल में छुपाए जा रहे हैं। शायरी 2 वो कहते हैं, भुला दो सब ग़म, कैसे बताएं, हर रंज ही तो है मेरा हमदम। शायरी 3 अश्कों की बारिश में, दिल का शहर डूबा है, तेरा दिया हर रंज , अब मेरा महबूब है। शायरी 4 दवा भी बेअसर है, दुआ भी है खामोश, मेरा हर रंज , बन गया है मेरा जोश। शायरी 5 किसने कहा कि खुशियों में ही है ज़िन्दगी, कभी-कभी तो हर रंज भी एक कहानी कहता है। शायरी 6 गमों की आहटें अब...