Shama (शमा)
शमा और परवाने: मोहब्बत के अलफ़ाज़ 1. रोशनी का आगाज़ रात के अँधेरे में जब कोई सहारा न हो, तब जलती है एक शमा , रौशनी का किनारा बन कर। 2. इश्क़ की तपिश परवाना जलता है शमा की लौ पर, इश्क़ में, क्या खूब अदा है, इस मोहब्बत की कहानी में। 3. दिल की आग जलते हैं दिल भी कभी-कभी, शमा की तरह, खामोश रहकर भी कितना कुछ कह जाते हैं। 4. उम्मीद की किरण हर रात के बाद एक सवेरा आता है, हर आँधी के बाद जलती है एक शमा । 5. तन्हाई का साथी ...