Dilruba (दिलरुबा)
दिलरुबा (Dilruba): मोहब्बत के अल्फ़ाज़ शायरी 1 तेरी अदाओं का क्या कहना, हर अदा में जादू है, मेरी रूह में बसी है तू, मेरी सच्ची दिलरुबा है। शायरी 2 जब से देखा है तुम्हें, होश ओ हवाश खो बैठे, इश्क़ की राहों में तुम ही हो मेरी दिलरुबा । शायरी 3 तेरी निगाहों की गहराई में खोया रहता हूँ, हर साँस में बस तेरा नाम, ओ मेरी दिलरुबा । शायरी 4 चाँद सी सूरत, सितारों सी चमक है तेरी, जन्नत की हूर है तू, मेरी प्यारी दिलरुबा । शायरी 5 मेरा हर ख्वाब, मेरी हर चाहत है तू, ज़िन्दगी का हसीन लम्हा, मेरी दिलरुबा । शायरी 6 तेरी जुल्फों के साए में सुकून मिलता है, हर मुश्किल में सहारा, मेरी दिलरुबा । शायरी 7 सुबह की पहली किरण, शाम का ढलता सूरज, हर पल याद आती है तू, मेरी दिलरुबा । शायरी 8 तेरी बातों में वो जादू है, जो दिल को छू जाए, अल्फाजों में बयाँ न हो, मेरी दिलरुबा । शायरी 9 जब भी देखता हूँ तुझे, दिल को मिलता है करार, मेरी धड़कनों की आवाज़, मेरी दिलरुबा । शायरी 10 इश्क़ की हर मंज़िल, हर डगर है तू ही तू, मेरे सफर का हमसफ़र, मेरी दि...