Jaana (जाना)
जाना (Jaana): दिल की राहों का सफर शायरी 1 हर राह पर तेरा इंतज़ार था, तुझे दूर तक जाना था, हम बेकरार थे। शायरी 2 क्या खूब कहा था उसने, वापस नहीं जाना , मगर दिल है कि फिर उसी राह पर ठहर जाना। शायरी 3 यह कैसा सफर है, कहाँ तक जाना है हमें, कुछ पता नहीं, बस चले जा रहे हैं हम। शायरी 4 कुछ भी कहो, कुछ भी करो, लेकिन यह मत भूलो, लौटकर फिर उसी मंज़िल पर जाना है तुमको। शायरी 5 क्यों डरते हो राह के काँटों से ऐ मुसाफ़िर, ज़िंदगी का नाम ही है आगे बढ़ते जाना । शायरी 6 वो कहता था कि रुक जाना , मगर मैं सुनता नहीं था, ज़िंदगी की धुन पर मुझे बस चलते जाना था। शायरी...