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Agosh (आग़ोश)

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आग़ोश: दिल को छू लेने वाली शायरी प्रेम, सुकून और आश्रय के अहसास में लिपटी कविताएँ तुम्हारी यादों की ठंडी हवा चली, और हम उनकी आग़ोश में सो गए। दुनिया की फ़िक्र से बेख़बर होकर, एक पल में सदियों के लिए खो गए। तेरी आग़ोश में आकर लगा यूँ, जैसे मिल गया हो खोया हुआ जहाँ। हर दर्द हर ग़म भुलाकर मैंने, पा लिया है मेरा सच्चा आसमां। जब रात ढले और चाँद चमकता है, तेरी आग़ोश में मेरा दिल धड़कता है। हर साँस में बस तू ही समाया है, यह कैसा अनोखा बंधन बन गया है। माँ की आग़ोश सा सुकून कहीं नहीं, उसमें लिपटकर हर ग़म भूल जाते हैं। उस ममता की छाँव में जीते हैं हम, और सारी दुनिया से दूर हो जाते हैं। बदलियों की आग़ोश में छ...

Simatna (सिमटना)

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सिमटना (Simatna): गहराई और एहसास जीवन के हर मोड़ पर, कुछ यादें, कुछ पल, कुछ भावनाएँ... सभी **सिमटना** चाहते हैं, एक कोने में, दिल के करीब, अपनी पहचान बनाने। यादों का सिमटना वक्त की रेत पर बनते-बिगड़ते निशान, बस तेरी यादों का दिल में सिमटना बाकी है। बिखरे थे अरमान जैसे खुले आसमान में, अब तेरी आहट से सब को सिमटना है। पुराने खतों में अक्सर वो मिलती है, मेरी खुशियों का तुझमें सिमटना अब भी तय है। हर एक पल को मैं बस जीना चाहता हूँ, ताकि तेरे एहसासों में ही सिमटना सीखूँ। अधूरी कहानियों का क्या होता है आखिर, क्या उन्हें भी किसी मोड़ पर सिमटना होता है? एहसासों का सिमटना दिल में हजार ख्वाहिशें लिए फिरता हूँ, पर तेरी बाहों में ही इन्हें सिमटना है। ...

Parda (पर्दा)

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पर्दा (Parda) पर शायरी का खूबसूरत संग्रह नज़र का, दिल का, या हकीकत का... हर **पर्दा** कुछ कहता है। तेरी आँखों के पीछे का राज़ क्या है, क्यों रखा है तुमने अपनी अदा पर **पर्दा** सा? उठा दो अब ये चेहरे से नज़रों का **पर्दा**, कि दीदार को बेचैन है ये दिल-ए-बर्बाद सा। मोहब्बत में कहाँ होता है कोई **पर्दा**, ये तो नज़रों का खेल है, नज़र से नज़र का। वो चुपचाप से आते हैं और चले जाते हैं, जाने कौन से **पर्दे** में छुपे रहते हैं। इश्क़ की आग में जलकर भी वो महफूज़ रहे, आँखों पर उनके हया का **पर्दा** था। रूह से रूह का मिलना तो एक बहाना था, असल ...

Hijab (हिजाब)

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हिजाब पर शायरी (Shayari on Hijab) पर्दे में भी है एक अलग नूर, एक अलग एहसास... चेहरे पर जब होता है हिजाब , एक अलग ही शान होती है, हर नज़र से बचकर, इसमें एक पहचान होती है। वो पर्दा है जो लाज का, वो हिजाब कहलाता है, हर एक निगाह को अपनी हद में रखना सिखाता है। खुदा की रहमत है ये, जो तुम पहनती हो हिजाब , तुम्हारी सादगी में ही छुपा है एक नया ख्वाब। नाज़ुकी का पर्दा है, आँखों में हया का नूर, हर अदा में झलकता है, जब हो सर पर हिजाब दूर। जब लहराता है हवा में तेरा खूबसूरत हिजाब , लगता है जैसे चाँद ने ओढ़ा हो कोई नया शबाब। तेरा हिजाब सिर्फ एक कपड़ा नहीं, ये तेरी इज्जत का ताज है, जो छुपाता है तुझको हर बुरी नज़र से, ये ...

Sharam (शर्म)

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शर्म की चादर एहसासों का एक गहरा पहलू शर्म का पहला एहसास उनकी निगाहों में देखी, एक अजीब सी **शर्म**, दिल में उठी लहर, बेखुदी की नरम. निगाहों की छुपी बात झुकी पलकों में छिपी है, उनकी **शर्म** की दास्तान, हर अदा में उनकी है, एक अलग ही पहचान. दिल की गहराइयों से कभी लबों पर हँसी, कभी आँखों में **शर्म**, ये दिल का रिश्ता है, गहरा और गरम. इश्क की निशानी इश्क में डूबे हैं, अब कोई गिला नहीं, उनकी हर **शर्म** में, हमें कुछ मिला सही. खूबसूरती का लिबास चेहरे पर उनके, **शर्म** का अनोखा नूर है, जैसे चांद को भी, खुद पर थोड़ा गुरूर है. ...

Hayaa (हया)

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हया की रंगीन दुनिया: शायरी का अनमोल खज़ाना नज़र में हया, दिल में पाकीज़गी लबों पे है मुस्कान और आँखों में गहरा पानी है, तेरी हया ही तो मेरी मोहब्बत की निशानी है। चेहरे पे आती है तेरे जब भी थोड़ी सी लाली, समझ लेता हूँ कि तुमने ओढ़ी है हया की चादर काली। इश्क़ में भी रहे एक अदब, एक पर्दा सा, यही तो सिखाती है हमें ये पाकीज़ा हया। नज़रें झुका के चलना भी एक अदा है तेरी, रूह को छू जाती है तेरी ये प्यारी सी हया मेरी। दामन को अपनी हया से यूँ सँवारो तुम, के देखने वाला भी कहे, क्या नायाब हो तुम। जब कोई देखे तुम्हें, तो तुम शर्...