Janaza (जनाज़ा)
जनाज़ा (Janaza) पर दिल छू लेने वाली शायरी शायरी 1 जब उठा मेरा जनाज़ा , सबने कहा रोना नहीं, कोई पूछे उससे, जिसने खोया सब कुछ, जीना नहीं। शायरी 2 मेरी मौत पर सब हैरान थे, मेरा जनाज़ा देखकर, ज़िन्दगी भर जो खामोश रहा, वो आज बोल पड़ा। शायरी 3 आज उसके दिल में भी मेरा ख़्याल आएगा, जब मेरा जनाज़ा उसकी गली से गुज़र जाएगा। शायरी 4 बड़ी ख़ामोशी से निकला मेरा जनाज़ा यार, कोई आंसू ना बहा, कोई आहट ना सुनी। शायरी 5 शायद अब उसे मेरी याद आए, मेरी क़द्र हो, जब मेरा जनाज़ा उसके घर के सामने से गुज़रे। श...