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Bikharna (बिखरना)

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बिखरना (Bikharna): दिल की गहराइयों से 1. यादों का बिखरना तेरी यादें हवाओं में जब भी बिखरना शुरू करती हैं, मेरा दिल सहम जाता है, आंखें भीगना शुरू करती हैं। 2. ख्वाबों का टूट जाना हमने जो देखे थे ख्वाब, पल भर में बिखरना सीख गए, हकीकत की ठोकर से, हम फिर से जीना सीख गए। 3. रिश्तों का टूटना कांच से नाजुक थे रिश्ते, कब कौन जाने बिखरना था, संभाले हमने भी बहुत, पर तकदीर को तो कुछ और करना था। 4. रेत सा वजूद रेत सा वजूद था मेरा, हवाओं के साथ बिखरना ही था, क्या शिकायत करूं किसी से, मुझे तो मिटना ही था। 5. उम्मीदों का छोटी सी चिंगारी थी उम्मीदों की, कब तक जलती रहती, तेरी बेरुखी की हवा ने, उसको भी बिखरना सिखा दिया। 6. दिल का दर्द ...

Itr (इत्र)

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इत्र : खुशबूदार अहसासों का गुलदस्ता नज़र का इत्र तेरी नज़र का जादू, क्या खूब है ' इत्र ' जैसा, जहाँ से गुज़रे, हर सू महकाए, ऐसा। यादों का इत्र कुछ यादें ऐसी होती हैं, जैसे खुशबूदार ' इत्र ', ज़िंदगी की किताब में, महकते हर पन्ने के मित्र। मोहब्बत का इत्र मोहब्बत का ' इत्र ' तो ऐसा है साक़ी, जो रूह में बस जाए, मिटे न कभी बाक़ी। सांसों का इत्र तेरी सांसों में घुला है वो ' इत्र ' जानाँ, जो हर पल मुझको खींचे, तेरा आशियाना। दिल का इत्र मेरे दिल में तुम्हारा ' इत्र ' बसा है, हर धड़कन में तुम्हारी ख...

Khushboo (ख़ुशबू)

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ख़ुशबू: दिल को छू लेने वाली शायरी ख़ुशबू का जादू तेरी यादों की जो ख़ुशबू आती है, वो मेरी रूह को हर पल महका जाती है। फ़िज़ा में इत्र फूलों से बढ़कर है तेरी ख़ुशबू , जिससे महकती है ये सारी आरज़ू। यादों की महक पुरानी किताबों से आती वो ख़ुशबू , जैसे याद दिलाती हो बचपन की रु-ब-रू। बारिश की सोंधी पहली बारिश की वो सोंधी ख़ुशबू , मिट्टी की यादें, हर दिल को करे बेकाबू। प्यार की महक मेरे प्यार की है वो अनमोल ख़ुशब...

Mehek (महक)

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महक: ख़ुशबू का सफ़र - दिल को छू लेने वाली शायरी खुशबू-ए-यार तेरी साँसों की जो उठती है हर पल, वो ही तो है मेरे दिल की हसीन महक । यादों का चमन गुज़रे लम्हों की यादों का चमन, आज भी देता है वही पुरानी महक । बहार की निशानी जब भी खिलते हैं फूल गुलशन में, आ जाती है उनकी मीठी महक । मिट्टी का प्यार पहली बारिश की बूँदों में घुली, कितनी प्यारी होती है मिट्टी की महक । आंचल की छाँव माँ के आँचल में मिलती है जो, उसकी निराली ही है अपनी महक । ख़्वाबों का सफर हर रात आती है ख़...

Khichav (खिंचाव)

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खिंचाव (Khichav): दिल की गहराइयों से... शायरी 1 कभी दूरियों का होता है, कभी नज़दीकियों का. अजब सा है ये खिंचाव , रिश्तों की गहराइयों का. शायरी 2 उसकी आँखों में वो गहरा खिंचाव था, जो हर बार मुझे अपनी ओर ले आता था. शायरी 3 दिल में रहता है एक अजीब सा खिंचाव , जैसे कोई डोर खींचे, बिन बताए, बिन पूछे. शायरी 4 क़िस्मत की डोर में कैसा ये खिंचाव है, जिसे चाहा वो दूर, जो नहीं, वो पास है. शायरी 5 मुश्किलों में भी एक उम्मीद का खिंचाव है, टूटते तारों में भी एक नया एहसास है. शायरी 6 ...